हर तरफ खुशी का माहौल, हाथों में मजहबी परचम और जुबां पर नारा-ए-तकबीर अल्ला हो अकबर, नारा-ए-रिसालत या रसूल्ललाह। फिजां में महकती गुलाब और इत्र की खुशबू। नात पाक का नजराना पेश करतीं तालिबे इल्म की टोलियां और नबी की शान में तकरीर करते उलमा। गुरुवार को शहर में निकाले गए ये जुलूस-ए मोहम्मदी का।
हुजूर रहमते आलम 12 रबी उल अव्वल मुताबिक 20 अप्रैल 571 ईस्वी बरोज पीर सुबह सादिक के वक्त दुनिया में तशरीफ लाए। आपकी आमद पर पूरी कायनात रोशनी से जगमगा उठी। लिहाजा बरोज जुमेरात हर तरफ खुशी का महौल था। बाद नमाज फज्र जुलूस-ए-मोहम्मदी की तैयारी शुरू कर दी गई थी।
मदरसों और मोहल्लों से जुलूस किला मैदान पहुंचने लगे थे। फैजाने जमाली, मर्कजी दर्सगाह, अलजामेआतुल इस्लामिया, जमाले मुस्तफा, खानकाहे नूरिया, मदरसा एजाजुल उलूम से निकाला गया जुलूस भी किला पहुंचा। जुलूस अंजुमन फैजाने जमाल के सदर शाह फरहत अहमद जमाली की कयादत में नारा-ए-तकबीर अल्लाहो अकबर के साथ सर्राफा बाजार की जानिब रवाना हो गया।
ज्वालानगर में लाइन वाली मस्जिद से जुलूस-ए-मोहम्मदी इमाम सैयद मोहम्मद नूरानी, सदर मोहम्मद हनीफ, नायब सदर यूसुफ, नईम शम्सी, नवाब दूला खां, हाजी इकबाल, कारी गुलाम नबी की कयादत में निकाला गया। ज्वालानगर और अजीतपुर का जुलूस शौकत अली रोड से होता बड़े जुलूस में शामिल हो गया।
इसी तरह राजद्वारा और मंसूरपुर से भी जुलूस निकाले गए। जुलूस जच्चा-बच्चा सेंटर, सर्राफा बाजार, पान दरीबां, गुईया तालाब, इमली झूले वाली, थाना पाखड़, बजौड़ी टोला, होता हुआ आस्ताना-ए- आलिया जमालिया पहुंचा। जुलूस में मदरसों के तालिबे इल्म की टोलियां नात पाक पढ़ रही थीं। उलमा नबी की शान में तकरीर कर रहे थे।
हर तरफ गुलाब और इत्र की खुशबू महक रही थी। खुशी में आशिके रसूल आतिशबाजी भी छोड़ रहे थे। आस्ताना-ए-आलिया जमालिया में दुआ के साथ जुलूस का खत्म हो गया। जुलूस में आस्ताना आलिया जमालिया के नायब सज्जादानशीन शाह फहद अली जमाली, शाहिद अली खां जमाली, आरिफ जमाली, बाकर खां, अथहर जमाली थे।