जिला पंचायत अध्यक्ष अब्दुल सलाम वित्तीय और प्रशासनिक अधिकार सीज कर दिए
गए हैं। इस संबंध में पंचायती राज विभाग के प्रमुख सचिव चंचल तिवारी ने
आदेश जारी कर दिया है। प्रमुख सचिव ने अपने आदेश में कहा है कि अब्दुल सलाम
के खिलाफ वित्तीय व प्रशासनिक अनियमितता करने की शिकायत पर शासन के संज्ञान में लाया गया है।
मंडलायुक्त
से 15 दिन के अंदर जांच रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए
हैं। प्रमुख सचिव पंचायती राज चंचल तिवारी ने 22 दिसंबर को जारी आदेश
में कहा है कि रामपुर के जिला पंचायत अध्यक्ष द्वारा वित्तीय एवं प्रशासनिक
अनियमितता किए जाने के संबंध में जिलाधिकारी की ओर से शासन को जानकारी दी
गई है।
अब्दुल सलाम पर जिला पंचायत द्वारा कराए गए निर्माण कार्य में
अनियमितता की शिकायत है। आदेश में 21 शिकायतों का उल्लेख किया गया है। आदेश
में कहा गया है कि अधिकांश कार्य प्रारंभ करने से पहले ब्योरेवार नक्शे का
अनुमान नहीं तैयार किया गया है, स्वीकृत नक्शों व अनुमानों में परिवर्तन
और विस्तार 10 फीसदी की सीमा से अधिक हुआ है।
टेंडर के संबंध में निर्धारित
प्रक्रिया का समुचित रीति से पालन नहीं किया गया, निर्माण कार्य प्रारंभ
करने से पहले दिनांक अंकित नहीं किया गया है। जिला पंचायत निर्माण कार्य
नियमावली 1984 के प्रवाधनों का अनुपालन सुनिश्चित न करते हुए अनियमित
भुगतान किया गया है।
जिला पंचायत अध्यक्ष, तत्कालीन अपर मुख्य
अधिकारी, अधिशासी अभियंता एवं अपर अभियंता जिला पंचायत रामपुर उत्तरदायी
हैं। इसमें कहा गया है कि उ.प्र. क्षेत्र पंचायत तथा जिला पंचायत
अधिनियम 1961 की धारा 29 में यह प्रावधान है कि अध्यक्ष द्वारा
वित्तीय व अन्य अनियमितता की गई है तो आरोप मुक्त होने तक अधिकार सीज रहेंगे।
इस आधार पर
आरोप मुक्त होने तक अब्दुल सलाम आरोप मुक्त होने तक अपने वित्तीय व
प्रशासनिक शक्तितयों का संपादन नहीं करेंगे। इसकी अंतिम जांच मंडलायुक्त को
सौंपी गई है। 15 दिन के अंदर वो अपनी रिपोर्ट शासन को उपलब्ध कराएंगे।
वहीं, अब्दुुल सलाम का कहना है कि यह
आदेश राजनीति से प्रेरित है, जो आरोप लगाए गए हैं, गलत है। पूरे मामले में
मैं बृहस्पतिवार को प्रेस कांफ्रेंस का आयोजन कर जानकारी दूंगा।