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वक्त के साथ जर्जर होती जा रही है अद्भुत निर्माण की विरासत

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रामपुर। रियासत काल में रामपुर में कई ऐसे निर्माण कराए गए हैं, जो स्थापत्य कला के अद्वितीय उदाहरण हैं। देखरेख के अभाव में ये ऐतिहासिक धरोहर जर्जर होती जा रही हैं। इनके स्वर्णिम इतिहास और निर्माण को बचाने की दिशा में ठोस कदम नहीं उठाए गए हैं। रामपुर के किला और रजा लाइब्रेरी की इमारत को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने की बात कुछ साल पहले उठी थी, लेकिन समय के साथ यह बात भी ठंडे बस्ते में चली गई। रजा लाइब्रेरी एशिया की सबसे बड़ी लाइब्रेरी है। यहां पर दुर्लभ पांडुलिपियां, ऐतिहासिक दस्तावेज, इस्लामी सुलेख के नमूने, लघु चित्र, खगोलीय उपकरण और अरबी और फारसी भाषा में दुर्लभ सचित्र कार्य का बहुत दुर्लभ और मूल्यवान संग्रह संरक्षित है। लाइब्रेरी में संस्कृत, हिंदी, उर्दू, पश्तों अन्य महत्वपूर्ण पुस्तकों व दस्तावेजों के अलावा इस्लामी धर्म ग्रंथ कुरान-ए-पाक के पहले अनुवाद की मूल पांडुलिपि मौजूद है। लाइब्रेरी के अरबी पांडुलिपियों के संग्रह में सातवीं शताब्दी का प्राचीन एवं दुर्लभ पवित्र कुरआन चतुर्थ खलीफा हजरत अली द्वारा कूफी लिपि में हिरन की खाल पर हस्तलिखित है। इसकी प्रतिलिपि ईरान के सशक्त धार्मिक नेता अयातुल्लाह सैय्यद अली हुसैनी खामनई को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अपनी ईरान यात्रा के दौरान 23 मई 2016 को भेंट की थी। ऐसा बेशकीमती ज्ञान का खजाना किला परिसर स्थित हामिद मंजिल में है जो कि, सवा सौ साल से अधिक पुराना भवन है। इस बिल्डिंग को 1904 में बनवाया गया था।
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लेकिन, देखरेख के अभाव में नवाब हामिद अली खां द्वारा निर्मित कराई गई यह बिल्डिंग अब खराब होती जा रही है। यह बिल्डिंग इंडो-इस्लामिक स्थापत्य कला का अद्वितीय उदाहरण है। लाइब्रेरी की बिल्डिंग हामिद मंजिल का निर्माण ब्रिटिश इंजीनियर डब्ल्यूसी राइट की देखरेख में हुआ था। हालांकि, 2020 में लाइब्रेरी की इस बिल्डिंग को यूनेस्को की सूची में शामिल कराने की बात उठी थी। तत्कालीन जिलाधिकारी आंजनेय कुमार सिंह ने लाइब्रेरी की बिल्डिंग का निरीक्षण किया था। इस दौरान यह सामने आया था कि बिल्डिंग कई जगह से खराब हो रही है। इसमें सीलन लग रही है। इस पर बिल्डिंग को संरक्षित करने के लिए उन्होंने एएसआई की टीम को यहां बुलाने की बात कही थी। उन्होंने लाइब्रेरी की बिल्डिंग को यूनेस्को की हेरिटेज बिल्डिंग्स की सूची में शामिल कराने के लिए राज्यपाल से संस्तुति भी कर दी थी, लेकिन इसके बाद बिल्डिंग के संरक्षण को लेकर कोई ठोस कदम नहीं उठाए गए। पूर्व में भेजे गए प्रस्ताव भी ठंडे बस्ते में पड़ गए।
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