डूंगरपुर के एक मामले में सजा तो दूसरे में बरी भी हो चुके हैं आजम
डूंगरपुर प्रकरण में आजम खां पर 12 मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें से एक मामले में 31 जनवरी को आजम खां बरी हो चुके हैं। वहीं दूसरे मामले में आजम खां को सात साल की कैद व आठ लाख रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई जा चुकी है। यह सजा कोर्ट ने 18 मार्च को सुनाई थी। अब कोर्ट तीसरे मामले में बृहस्पतिवार को फैसला सुना सकती है।
डूंगरपुर प्रकरण के अन्य नौ मामले भी कोर्ट में विचाराधीन हैं। बेटे अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में आजम को सात साल की सजा हुई। तभी से वो सीतापुर जेल में बंद हैं। इसी मामले में उनके बेटे अब्दुल्ला आजम हरदोई जेल में और पत्नी डाॅ. तजीन फातमा रामपुर जेल में हैं।
शत्रु संपत्ति कब्जाने के मामले में नौ को होगी सुनवाई
आजम खां पर दर्ज शत्रु संपत्ति कब्जाने के मामले में बुधवार को गवाह कोर्ट पहुंचा, लेकिन गवाह के बीमार होने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। अब कोर्ट नौ अप्रैल को सुनवाई करेगी। वर्ष 2019 में आजम खां के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज हुए थे। इनमें अजीमनगर थाने में शत्रु संपत्ति कब्जाने के भी मामले हैं।
इनमें आरोप है कि आजम खां ने शत्रु संपत्ति को जौहर यूनिवर्सिटी में मिला लिया। आजम खां के अलावा अन्य लोग भी मुकदमे में नामजद हैं। मुकदमे की जांच के बाद पुलिस ने आरोप पत्र न्यायालय में दाखिल किए थे। इसकी सुनवाई एमपी-एमएलए स्पेशल कोर्ट मजिस्ट्रेट ट्रायल में चल रही है।
बुधवार को सुनवाई होनी थी, लेकिन गवाह के बीमार होने की वजह से सुनवाई नहीं हो सकी। हालांकि, गवाह कोर्ट भी पहुंचा था। वरिष्ठ अभियोजन अधिकारी अमरनाथ तिवारी ने बताया कि न्यायालय ने अगली सुनवाई के लिए 19 अप्रैल की तारीख तय कर दी है।
अमर सिंह के परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में कैमरामैन ने दी गवाही
आजम खां द्वारा सपा के नेता रहे अमर सिंह के परिवार के खिलाफ आपत्तिजनक टिप्पणी करने के मामले में बुधवार को कैमरामैन ने कोर्ट में गवाही दी। आजम खां के अधिवक्ता ने जिरह की। उनकी गवाही पूरी हो गई है। इस मामले की सुनवाई नौ अप्रैल को होगी।
बताते चलें कि जौहर विश्वविद्यालय में सपा नेता आजम खां ने एक निजी चैनल को साक्षात्कार देते हुए दिवंगत सपा नेता अमर सिंह के परिवार पर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी, जिस पर उनके खिलाफ लखनऊ में केस दर्ज हुआ था। जिसके बाद यह मामला अजीमगनगर थाने में स्थानांतरित कर दिया गया था। यह मामला कोर्ट में विचाराधीन है।