दरगाह प्रकरण में समझौता टूटने पर शुक्रवार की शाम दोबारा बुलाई गई बैठक भी बेनतीजा रही। समझौते को अमल को लेकर नोक-झोंक हुई और प्रशासन का रुख सख्त रहा। प्रशासन ने समझौता लागू कराने को दोनों पक्षों को सात दिनों का वक्त दिया है। प्रशासन ने दो टूक कहा है कि समझौता तोड़ने वाला गुनहगार है।
तहसील में गुरुवार को दरगाह प्रकरण को लेकर प्रशासनिक अफसरों के बीच हुए समझौते के टूटने पर प्रशासनिक अफसरों ने दोनों पक्षों की बनाई गई कमेटी के 14 सदस्यों को बुलाया। जिस पर समझौते को अमल कराने की कवायद दोहराई गई। जिस पर समझौते में शामिल एक पक्ष के लोगों ने अफसरों से स्पष्ट कह दिया। समझौते को उनके समाज के लोगों को स्वीकार नहीं है और वह दरगाह का पुनर्निर्माण नहीं करेंगे। जिस पर दूसरे पक्ष का कहना था कि वह गुरुवार को हुए समझौते का पालन करने को तैयार है। उन्होंने प्रशासन को यह भी लिखकर दे दिया कि वह मोक्षधाम में लगने वाली भगवान शंकर की प्रतिमा पर पूजा नहीं करेंगे और न ही यहां पर कंावड़िए जल चढ़ाएंगे। लेकिन दरगाह कमेटी की ओर से शामिल हुए समझौते के सदस्यों ने हाथ खड़े कर दिए। उनका कहना है कि वह अपने समाज का विरोध झेलने की हालत में नहीं है।
समझौते के मुद्दे से वार्ता में शामिल सदस्य कई बार भटके। जिस कारण अफसरों के सामने ही नोक-झोंक हो गई। बाद में एक दूसरे पर आरोप-प्रत्यारोप लगने पर हंगामा हो गया। पालिकाध्यक्ष पति का कहना था कि अतिक्रमण हटकर रहेगा। जिस पर जामा मसजिद के सदर का कहना था कि उससे पहले प्रशासन को दरगाह की जमीन पूरी करके देनी होगी। जिस मामला तूल पकड़ गया। तब अफसरों को हस्तक्षेप करना पड़ा। समझौते कमेटी में शामिल एक पक्ष के समझौता टूटने पर अफसरों का पारा चढ़ गया। उनका कहना था कि बातें दस हजार लोगों को एकत्र करने की करते हो लेकिन अपने समाज के लोगों कोे नहीं समझा पाते हैं।
दोबारा बुलाई गई बैठक में समझौते को लेकर प्रशासन ने दो टूक कहा कि वह समझौते को शासन को भेज चुके हैं। इसलिए समझौता पत्थर की लकीर है। जिसको तोड़ने वाले गुनहगार हैं। प्रशासन ने समझौते पर अमल कराने की कवायद के लिए सात अप्रैल तक अल्टीमेटम दिया और सात अप्रैल को कमेटी को बुलाया। इस दौरान उपजिलाधिकारी लालता प्रसाद शाक्य, सीओ.ओपी आर्य, कोतवाल आरबी कौल, पालिकाध्यक्ष दीक्षा गंगवार, नरेंद्र सिंह गंगवार, राजीव सक्सेना कड़क, अशोक बजरंगी, हरिओम अग्रवाल, मुकेश पटेल, प्रताप सक्सेना, विकास शुक्ला तथा दूसरे पक्ष के मोहम्मद जाहिद खां, मोहम्मद सईदुल रहमान, सलीम मलिक, इकरार हुसैन, मुस्तकीम, अजीम मलिक शामिल रहे।