रिकार्ड रूम और भूमाफियाओं की साठगांठ का आलम ये है कि सरकारी जमीन के रिकार्ड के पन्ने फाड़कर उसमें नए पन्ने लगाकर जमीन को अपना बना लिया गया। इसके बाद इस टैंपर्ड रिकार्ड को फिर से रिकार्ड रूम में जमा करा दिया गया। प्रशासन को जब अपनी जमीन की याद आई और कार्रवाई शुरू हुई तो आरोपियों ने कोर्ट की शरण ले ली। तशका के जमीनों के रिकार्ड में हुई हेरीफेरी की जांच पूरी हो चुकी है।
घपलेबाजी में रिकार्ड रूम के दस कर्मचारी समेत कुल 14 लोग फंस गए हैं। इन पर रिपोर्ट दर्ज कराने की तैयारी की जा रही है। जल्द ही रिपोर्ट डीएम को सौंपी जाएगी। रामपुर में सरकारी जमीन के रिकार्ड में हेराफेरी कर उसे अपना बनाया जा रहा है। डुंगरपुर से शुरू हुआ ये खेल ताशका तक पहुंच गया था। ताशका में नगर पालिका की जमीन है, भूमाफियाओं ने इसे भी नहीं बख्शा। सरकारी मशीनरी से मिलकर करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन अपने नाम पर दर्ज करा ली। सीडीओ की अध्यक्षता में कराई जा रही मामले की जांच पूरी हो चुकी है।
जांच के दौरान ये बात सामने आई है कि रिकार्ड रूम के दस कर्मचारियों की मदद से चार साल के दौरान करोड़ों रुपये की सरकारी जमीन को निजी बना लिया गया। इसके लिए सरकारी जमीनों के रिकार्ड के पन्नों को फाड़ दिया गया। नए पन्ने जोड़ते हुए उसमें अपना नाम दर्ज करा लिया। नाम दर्ज कराने के साथ ही इन लोगों ने जमीन पर कब्जा कर लिया। जांच कमेटी ने रिकार्ड में दर्ज फर्जी नामों को हटाने की सिफारिश की गई है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक रिकार्ड रूम में चार साल की तैनाती के दौरान करीब दस कर्मचारी इस घपले में दोषी पाए गए हैं।