रामपुर। लखनऊ में हुए अग्निकांड के बाद जिला प्रशासन की सक्रियता शहर के कोचिंग संस्थानों तक पहुंच गई है, लेकिन उन होटल, मॉल और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों की अग्नि सुरक्षा व्यवस्था पर अब भी सवाल खड़े हैं, जहां प्रतिदिन हजारों लोगों की आवाजाही होती है। कई बड़े प्रतिष्ठानों में अग्निशमन व्यवस्था या तो अधूरी है या केवल कागजों तक सीमित है।
बुधवार को मुख्य अग्निशमन अधिकारी विजय कुमार सिंह और सिटी मजिस्ट्रेट सालिक राम सिविल लाइंस स्थित एक कोचिंग सेंटर का निरीक्षण करने पहुंचे, लेकिन संस्थान बंद मिला। इसके बाद अधिकारियों ने जांच अभियान जारी रखने और कमियां मिलने पर कार्रवाई की बात कही। विभाग की ओर से अब तक 15 कोचिंग संचालकों को नोटिस जारी किए जा चुके हैं।
हालांकि सवाल यह भी उठ रहा है कि क्या आग का खतरा केवल कोचिंग संस्थानों तक सीमित है। शहर के कई होटल, बैंक्वेट हॉल, मॉल और बहुमंजिला व्यावसायिक इमारतों में अग्निशमन मानकों की स्थिति क्या है और उनकी नियमित जांच कब होगी। इनमें से कई स्थानों पर आपातकालीन निकास, फायर अलार्म और अग्निशमन उपकरणों की स्थिति को लेकर पहले भी सवाल उठते रहे हैं।
लखनऊ की घटना ने यह साबित कर दिया है कि सुरक्षा मानकों में छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे का कारण बन सकती है। ऐसे में जरूरत केवल नोटिस जारी करने की नहीं, बल्कि पूरे शहर में व्यापक और निष्पक्ष जांच अभियान चलाने की है, ताकि किसी हादसे के बाद नहीं, उससे पहले लोगों की जान बचाई जा सके।
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लोगों की सुरक्षा को लेकर लगातार चेकिंग अभियान चलाया जा रहा है। जहां पर कमी पाई जा रही है, उसे नोटिस देकर जवाब मांगा जा रहा है। जवाब नहीं देने पर विभागीय कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। -विजय कुमार सिंह, मुख्य अग्निशमन अधिकारी