जैविक खेती के क्षेत्र में पदमश्री से सम्मानित भारत भूषण त्यागी।
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रामपुर। कृषि कानूनों से नाराज किसान जहां दिल्ली को घेरे बैठे हैं, वहीं जैविक खेती को लेकर पद्मश्री पाने वाले किसान भारत भूषण त्यागी कृषि कानूनों का स्वागत करते नहीं थक रहे हैं। उनका कहना है कि इन कानूनों के लिए 20 वर्ष तक उन्होंने संघर्ष किया है। त्यागी के मुताबिक बाजार वाद के बीच गिर चुकी खेती न केवल जमीन को बंजर कर रही है बल्कि किसानों को कर्जदार भी बना रही है। उन्होंने कहा कि किसान इन कानूनों पर चर्चा करें विवाद नहीं क्योंकि विवाद से किसी समस्या का हल नहीं होता आपसी संवाद से होता है।
बुधवार को रामपुर पहुंचे त्यागी निरीक्षण भवन में मीडिया से मुखातिब थे। उन्होंने कहा के कृषि दरअसल बाजार वाद के चंगुल में फंसी हुई है। मशीनों के प्रयोग और रासायनिक खादों के चलन से न केवल जमीन दिन-ब-दिन बंजर होती जा रही है। इससे किसान कर्जदार होता जा रहा है, ऐसे में नए कानूनों में जो बदलाव किए गए हैं। किसानों को उन्हें खुले मन से समझना चाहिए और अपनी मांगों को रखकर सरकार के साथ संवाद करना चाहिए। न कि विवाद की मुद्रा में धरना और प्रदर्शन करना चाहिए।
कृषि कानूनों में भंडारण की सीमा समाप्त किए जाने को लेकर जब भारत भूषण त्यागी से सवाल किया गया तो उन्होंने कहा कि ऐसा नहीं है कि केवल कॉर्पोरेट कंपनियों को ही भंडारण के लाइसेंस दिए जा रहे हैं। दरअसल, हमारे देश में जो उपज होती है, उसमें से बड़ी मात्रा में भंडारण की व्यवस्था न होने के चलते व्यर्थ जाती है। फसलें खराब होती हैं। इसलिए अगर भंडारण की सीमा समाप्त होगी और निजी क्षेत्र में कंपनियां उसकी व्यवस्था करेगी तो इससे फायदा ही होगा। उन्होंने कहा कि मंडिया खत्म नहीं की जाएंगी। केवल समानांतर व्यवस्था की जा रही है जिससे किसानों का फायदा होने वाला है।