रामपुर। कांच ही बांस की बहंगिया... आदि भजनों के साथ व्रती महिलाओं ने बुधवार को डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके साथ ही छठ मैया की पूजा-अर्चना कर घाटों पर दीपदान किया। पूजा स्थलों को बिजली की रंग-बिरंगी झालरों से सजाया गया था।
छठ पूजन के लिए बुधवार को सुबह घरों में पूजा की तैयारियां शुरू हो गई थीं। व्रती महिलाओं ने प्रसाद के लिए ठेकुआ बनाया गया। ठेकुआ बनाने के साथ ही सुपली सजाई गई। सुपली में ठेकुआ, पूड़ी कई तरह के फल रखे गए। इसके बाद पारंपरिक वेशभूषा में सजी व्रती महिलाएं दाहिने कंधे पर दउरा (पूजन सामग्री) रखकर सूरज छुपने से पहले ही घाटों पर पहुंच गई थीं। ज्वाला नगर के रजा टेक्सटाइल कॉलोनी, कृष्णा मंदिर सीआरपीएफ कॉलोनी आदि स्थानों पर बने अस्थाई तालाबों और कोसी नदी पर बने घाटों पर व्रती महिलाओं ने पानी में खड़े होकर व्रतियों ने तीन बार सुपली को पानी में छुआया। सुहागिन महिलाओं ने सिर से नाक तक सिंदूर लगाया और पूजा-अर्चना के बाद डूबते सूर्य को अर्घ्य दिया। इसके बाद दीपदान कर छठ मइया से मनौती मांगी।