मौसम का मिजाज फिर बिगड़ गया। आसमान पर उमड़े बादल और गडग़ड़ाबट से किसानों के दिल दहल गया। कहीं बूंदाबांदी तो कहीं तेज हवा चली। बूंदाबांदी से खेतों में कटा पड़ा गेहूं की लांक भीग गया।
इस मौसम में बारिश और ओले पडने का डर बना रहता है। दो साल पहले बेमौसम बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंचा था। सदमे से कई किसानों की मौत भी हो गई थी। इस वक्त गेहूं की कटाई हो रही है। हालांकि बिलासपुर, सदर, स्वार क्षेत्र में अधिकतर खेतों में कटाई और गहाई हो चुकी हैं। जबकि, शाहबाद और मिलक क्षेत्र में कटाई चल रही है। किसानों को गेहूं की फसल की कटाई के साथ खराब मौसम की भी चिंता सता रहा है।
शनिवार को दोपहर बाद आसमान पर उमड़-घुमड़कर काले बादल छा गए। बादलों में गडग़ड़ाहट होने लगी। इसके बाद बूंदाबांदी और तेज हवा चलने लगीं। खराब मौसम को देखकर किसानों का दिल दहल गया। बूंदाबांदी से खेतों में पड़ा गेहूं का लांक भीग गया। उप कृषि निदेशक वीरेंद्र कुमार कहना है कि शाहबाद इलाके में अभी भी गेहूं की कटाई हो रही है। बारिश और ओलावृष्टि से गेहूं की फसल को भारी नुकसान पहुंच सकता है।