रामपुर। सावन सूखा बीत गया, भादो भी जाने की तैयारी में है, लेकिन बदरा नहीं बरसे। मानसून की इस बेरुखी ने जिले के किसानों की परेशानी बढ़ा दी है। अच्छे मानसून की उम्मीद में किसानों ने धान की फसल जैसे-तैसे लगा दी थी, लेकिन बारिश नहीं होने से उसकी सिंचाई पंपिंग सेट व ट्यूबवेल चलाकर करनी पड़ी । डीजल का रेट आसमान को छू रहा है। इस वजह से धान उत्पादक किसानों का लागत खर्च बढ़ गया है। किसान अब इस चिंता है कि खर्च बढ़ने की भरपाई कैसे होगी।
जिले में खरीफ सीजन के दौरान लगभग 1.45 लाख हेक्टेयर में धान की खेती की जाती है। इस बार यह रकबा 1.41 लाख हेक्टेयर है। जिले में धान का उत्पादन लगभग 7.5 लाख मीट्रिक टन होता है। इस बार में उत्पादन इससे थोड़ा कम होने की संभावना है। क्योंकि सिंचाई के अभाव में कई किसानों की फसल खराब हो गई है। इस सीजन में जिले में बारिश औसत से भी कम हुई। इसके बाद भी किसानों ने अपनी मेहनत के बल पर खेती की है। किसानों को महंगा डीजल खरीद कर फसलों की सिंचाई करनी पड़ रही है। इससे किसानों पर अतिरिक्त भार पड़ रहा है। अगस्त माह में भी औसत से कम बारिश हुई। सितंबर माह में भी मानसून की बेरुखी जारी है। कई बार आसमान में बादल उमड़-घूमड़कर आ रहे है, लेकिन बिना बरसे ही हवा के झोंके के साथ उ़ड़ जा रहे हैं। ऐसे में इस बार किसानों के लिए धान की खेती घाटे का सौदा बन सकती है। फसल बेचने के बाद किसानों को लागत खर्च भी निकालना मुश्किल होगा।