रामपुर। सूबे के चर्चित कारतूस कांड में बृहस्पतिवार को कोर्ट में तारीख थी। जिसमें गवाह कोर्ट पहुंचे लेकिन, बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव की नामांकन प्रक्रिया के कारण अधिवक्ता कार्य से विरत रहे। इससे मामले में सुनवाई नहीं हो सकी। कोर्ट ने इस मामले में अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र में 26 अप्रैल 2010 को लखनऊ एसटीएफ की टीम ने स्थानीय पुलिस के साथ राम-रहीम पुल के नीचे से पीएसी के सेवानिवृत्त दरोगा यशोदानंदन को गिरफ्तार करते हुए कारतूस कांड का खुलासा किया था। एसटीएफ ने इस दौरान सीआरपीएफ के हवलदार विनोद और विनेश को भी गिरफ्तार किया था। एसटीएफ ने आरोपियों के कब्जे से बड़ी मात्रा में नकदी और कारतूस बरामद किए थे। जिसके बाद पुलिस ने आरोपियों की निशानदेही और पूछताछ के आधार पर मुरादाबाद पीटीसी में तैनात आर्मोरर नाथीराम सैनी को भी गिरफ्तार किया था। यशोदानंदन की निशानदेही पर इलाहाबाद, कानपुर, झांसी, मऊ आदि जनपदों से भी अन्य आरोपियों को गिरफ्तार किया गया था। कोर्ट में ट्रायल के दौरान मुख्य आरोपी यशोदानंदन की मौत हो चुकी है।
इस मामले में पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। यह मामला एडीजे द्वितीय की कोर्ट में चल रहा है, जिसमें बृृहस्पतिवार को तारीख थी। जिसमें एसटीएफ के हेड कांस्टेबल मिथलेश कुमार झा कोर्ट पहुंचे। बचाव पक्ष के अधिवक्ता देवेंद्र कुमार नंदा ने बताया कि बृहस्पतिवार को गवाह मिथलेश कुमार झा कोर्ट पहुंचे थे लेकिन, बृहस्पतिवार को बार एसोसिएशन के वार्षिक चुनाव को लेकर नामांकन की प्रक्रिया हो रही थी। इस कारण सुनवाई नहीं हो सकी। मामले में कोर्ट ने अगली तारीख 20 दिसंबर तय की है।