रामपुर। रामपुर नगर पालिका भवन को मिनी संसद के रूप में विकसित किया गया है क्योंकि इसका डिज़ाइन भारतीय संसद के पुराने भवन जैसा है, जो देखने में हूबहू संसद की याद दिलाता है। खासकर इसके ऐतिहासिक स्वरूप और संरचना के कारण, जिसे नवाबों के समय में बनाया गया था और अब इसे लोकतंत्र के प्रतीक के तौर पर देखा जाता है। इसका इतिहास 90 साल पुराना है। इस दौरान उसकी दो बार तस्वीर बदली गई।
रामपुर रियासतकाल में तत्कालीन नवाब रजा अली खां ने 1934 में रामपुर पालिका का गठन किया। इसके बाद रामपुर रियासत का विलय हो गया। सौलत अली खां पहली बार चेयरमैन बने। समय के साथ सीमा विस्तार होता रहा और चेयरमैन भी बनते रहे। पालिका का भवन समय के साथ जर्जर होने लगा तो सपा सरकार में नगर विकास मंत्री रहते हुए आजम खां ने नया पालिका भवन का निर्माण कराया। इसका निर्माण मिनी संसद की तर्ज पर कराया गया। इस भवन की बनावट भारतीय संसद से मिलती-जुलती है, जिससे यह एक मिनी संसद जैसा प्रतीत होता है। यह एक कला और संस्कृति की विरासत है, जिसे इंटेक जैसी संस्थाएं भी संरक्षित करती हैं, जो इसके ऐतिहासिक और स्थापत्य महत्व को दर्शाती हैं। मिनी संसद भारतीय लोकतंत्र और विरासत का एक अनोखा संगम है।