रामपुर में तैयार हो रही खादी ने हरियाणा से बंगाल तक अपनी धाक जमा रखी है। रेलवे को भी रामपुर में तैयार होने वाले खादी के आइटम बेहद पसंद आ रहे हैं। अकेले रेलवे को सालाना एक करोड़ की खादी की थान, चादरें, तौलिए और अंगोछे सप्लाई हो रहे हैं। खादी के तमाम आइटमों को रामपुर के साथ मुरादाबाद के कारीगर तैयार करते हैं। रामपुर में खादी के बनने वाले उत्पादों की बढ़ती डिमांड को देखते हुए बुनकरों को सोलर चरखा भी मुहैया कराया जा रहा है ताकि उत्पादन को और बढ़ाया जा सके।
खादी ग्रामोद्योग सेवा सदन में तीन हजार से अधिक बुनकर और कारीगर खादी के सामान तैयार कर रहे हैं। 160 कारीगर खादी के थान, चादरें, दरियां, तौलिए, अंगोछे तैयार करा रहे हैं। तीन हजार से ज्यादा कत्तिन सूत की कताई कर रहे हैं। रामपुर और मुरादाबाद के कारीगरों के हाथों से तैयार रामपुरी खादी ने बंगाल, मध्यप्रदेश, हरियाणा और उत्तराखंड में अपनी धाक जमा ली है।
इन प्रदेशों में सालाना 3 से 4 करोड़ के खादी के आइटम सप्लाई हो रहे हैं। रामपुरी खादी की डिमांड और बढ़ रही है। मांग बढ़ी है तो वर्ष 2016-17 में 5.50 करोड़ के उत्पादन का लक्ष्य भी बढ़ाया गया है। वर्ष 2015-16 में 4.60 करोड़ की खादी का उत्पादन किया गया था।
रामपुर में यह आइटम हो रहे तैयार
- मोटे और एनएमसी धागे से तैयार खादी का कपड़ा, सादा और रंगीन चादरें, तौलिए, कोटी, कंबल, लिहाफ, गद्दे, तकिए, अंगोछे, रेडीमेड शर्ट, कुर्ता-पायजामा, लेडीज सूट, शाल।
पसंद बढ़ी तो कारीगरों का दाम भी बढ़ा
सूत कताई की भी मजदूरी बढ़ा दी गई है ताकि बुनकर और कारीगरों में उत्साह बढ़े। तीन साल पहले कत्तिन को प्रति किलो रूई की कताई पर 50 से 60 रुपये दिए जाते थे, लेकिन अब 90 से 100 रुपये दिए जा रहे हैं। कत्तिन को मुफ्त में 250 अम्बर चर्खे भी उपलब्ध कराए गए हैं। खादी का और उत्पादन बढ़ाने के लिए 10 बड़े बुनकरों को मुफ्त में सोलर चरखे उपलब्ध कराए जाएंगे।
गुजरात से सीखेंगे डेनिम तैयार करने की तकनीक
अब खादी की डेनिम भी तैयार कर बाजार में उतारने की तैयारी शुरू हो गई है। सैंपल के तौर पर गुजरात से खादी से बने डेनिम के पीस मंगवाए गए हैं। डेनिम की तकनीक से कारीगरों को परिचित कराया जाएगा ताकि शहर रामपुर में भी खादी के डेनिम कपड़ों का उत्पादन बढ़ सके। डेनिम की तकनीक सीखने के लिए कुछ बुनकरों को गुजरात भी भेजा जाएगा।
उत्पत्ति केंद्र: ज्वालानगर, धनेली उत्तरी, रसूलपुर-फरीदपुर और भोट बक्काल।
कत्तिन-32 गांव, 3000 कत्तिन।
बुनकर- सागरपुर, खाता नगरिया और मुरादाबाद जनपद के फौलादपुर, दुल्लेपुर, गोपीवाला।
बुनकरों को दी जाने वाली सुविधाएं
- वर्क शेड के लिए 45 हजार रुपए, मुफ्त खडड़ी, दुर्घटना बीमा, साल में चार बार बोनस, इंटर तक बच्चों की पढ़ाई का खर्च।
- एनएमसी धागे से तैयार खादी और उसके आइटम की बंगाल, हरियाणा, मध्य प्रदेश और उत्तराखंड में भी डिमांड बढ़ रही है। चूंकि रामपुरी खादी रामपुर और मुरादाबाद के कुशल कारीगर तैयार कर रहे हैं। खादी की क्वालिटी भी अच्छी है। रेलवे को भी रामपुरी खादी पसंद है। कत्तिन और बुनकरों को और रोजगार मुहैया कराया जाए। - मोहन साहू, सचिव, खादी ग्रामोद्योग सेवा सदन