आचार संहिता के उल्लंघन एवं लोक संपत्ति निवारण अधिनियम के मामले में कोर्ट ने चमरौवा के बसपा विधायक यूसुफ अली को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया।
विधान सभा का 2007 में चुनाव हुआ था।
चुनाव के दौरान नायब तहसीलदार संजय मिश्रा ने स्वार से बसपा के प्रत्याशी रहे यूसुफ अली के खिलाफ स्वार थाने में आचार संहिता के उल्लंघन व लोक संपत्ति अधिनियम के तहत मुकदमा दर्ज कराया था। उन पर आरोप था कि दढ़ियाल और भीकमपुर के पुल पर पोस्टर चस्पा किए साथ ही लोक संपत्ति को भी क्षति पहुंचाई थी। पुलिस ने इस मामले की तफ्तीश करते हुए मामले की चार्जशीट को कोर्ट में दाखिल की थी। इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर प्रतिदिन कोर्ट में चल रही थी। कोर्ट ने बुधवार को इस मुकदमे का फैसला सुना दिया।
सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से वादी नायब तहसीलदार समेत 13 गवाह पेश किए और आरोपी को सजा देने की मांग रखी,जबकि बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने अपने समर्थन में दो गवाह पेश किए। उन्होंने दलील दी कि अभियोजन पक्ष अपना केस साबित कर पाने में नाकाम रहा है और गवाहों के बयानों में विरोधा भास है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एसीजेएम प्रथम अरविंद मिश्रा की कोर्ट ने साक्ष्य के अभाव में यूसुफ अली को बरी कर दिया।