उमस भरी गर्मी के बाद बारिश की बूंदें भले ही क्षणिक राहत देती हों लेकिन, यह शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर कर रहीं हैं। नतीजतन लोग संक्रामक रोगों का शिकार हो रहे हैं। इनमें सबसे अधिक डायरिया पीड़ित हैं। जिला अस्पताल में प्रतिदिन डायरिया पीड़ितों की संख्या का आंकड़ा सौ के आसपास पहुंच रहा है। डायरिया व अन्य संक्रामक रोगियों के ऐसे ही हालात निजी अस्पतालों व चिकित्सकों के क्लीनिक पर भी हैं।
कभी बादल तो कभी बारिश, इसके बाद तेज उमस और गर्मी। मौसम अपना मिजाज तेजी से बदल रहा है। तेज धूप के बाद बारिश को राहत के रूप में देखा जा रहा है लेकिन, ऐसा नहीं है। यह राहत सिर्फ उतनी देर के लिए है जितनी देर बारिश हो रही है। जबकि मौसम का लगातार बदलाव शरीर की प्रतिरोधक क्षमता को कमजोर करने के साथ बैक्टीरिया की सक्रियता को बढ़ा रहा है। जिससे कमजोर प्रतिरोधक क्षमता में बैक्टीरिया की बढ़ी सक्रियता लोगों को बीमार कर रही है। बुजुर्ग व बच्चों की प्रतिरोधक क्षमता युवाओं की तुलना में कम होती है ऐसे में मौसम का यह मिजाज उसे और कमजोर कर देता है।
जिला अस्पताल के फिजीशियन डा. एसएम कमल बताते हैं कि अस्पताल में रोजाना डायरिया के करीब सौ मरीज आ रहे हैं। खांसी-जुकाम, बुखार और सांस के मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। जिसका मुख्य कारण मौसम में लगातार बदलाव होना है। एक ही दिन में सुबह से शाम तक बारिश, तेज धूप और उमस के कारण शरीर की प्रतिरोधक क्षमता प्रभावित हो रही है और बैक्टीरिया की सक्रियता बढ़ रही है। जिससे लोग बीमार पड़ रहे हैं।
गंज थाना क्षेत्र के गूजर टोला मोहल्ला निवासी शाइस्ता को उल्टी-दस्त के साथ सांस लेने में परेशानी होने पर परिजनों ने जिला अस्पताल में भर्ती कराया था। बुधवार दोपहर शाइस्ता को डिस्चार्ज कर दिया गया लेकिन, वह अस्पताल के मुख्य द्वार पर पहुंचते ही चक्कर खाकर गिर पड़ी और उसकी हालत बिगड़ गई। इस पर परिजनों ने लापरवाही बरतने और बाहर से दवा मंगाने का आरोप लगाते हुए हंगामा िकया। सीएमएस डा. आरके ढल ने मामले के संज्ञान में न होने की बात कही है। वहीं सीएमओ डा. शंकर लाल सारस्वत ने कहा स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के लिए अब हर डाक्टर की निगरानी की जाएगी। इस मामले की भी जांच की जाएगी।