राष्ट्रपिता महात्मा गांधी से जुड़ी रामपुर में कई यादें हैं। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान बापू दो बार यहां आए थे। उनके निधन के बाद नवाब रजा अली खां उनकी अस्थियों को रामपुर लाए थे और यहां उनकी समाधि भी बनवाई थी। दिल्ली के बाद रामपुर ही ऐसा शहर है, जहां राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की समाधि है।
दुनिया भर में मशहूर गांधी जी की टोपी का इतिहास भी रामपुर से जुड़ा हुआ है। नौका आकार की खादी की टोपी रामपुर में ही तैयार की गई थी। यह टोपी खिलाफत आंदोलन की अगुवाई करने वाले मौलाना मोहम्मद अली जौहर की मां बी अम्मा ने तैयार की थी। यह टोपी बाद में दुनिया भर में गांधी टोपी के नाम से मशहूर हुई।
रजा लाइब्रेरी में रखे रामपुर को जानो आलेख में समाजसेवी महेंद्र सक्सेना ने लिखा है कि जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी 1919 में रामपुर आए थे। उस वक्त रामपुर रियासत के नवाब सैयद हामिद अली खां बहादुर थे। गांधी जी की उनसे मुलाकात खासबाग में होनी थी।
जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी नवाब से मुलाकात करने के लिए निकल रहे थे। तब नवाब के एक अधिकारी यहां पहुंचे। उन्होंने दरबार की एक परंपरा का हवाला देते हुए उन्हें बताया था कि नवाब से मिलने वाले अतिथि को सिर ढंकना होता है। इसके बाद बी अम्मा ने टोपी बनाई, जिसे पहनकर गांधी जी ने नवाब से मुलाकात की थी। उसके बाद यह टोपी दुनियाभर में मशहूर हो गई।