रामपुर। महिला के साथ दुष्कर्म करने के आरोप में तीन आरोपियों को कोर्ट से राहत नही मिली है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने तीनों का जमानत प्रार्थना पत्र खारिज कर दिया हैं।
सिविल लाइंस थाना क्षेत्र के गांव निवासी महिला ने आरोप लगाया था कि वह एक अस्पताल पर काम करती थी। पांच अप्रैल की शाम को अस्पताल संचालक अपने दोस्त तत्कालीन गंज कोतवाली प्रभारी के साथ अस्पताल पहुंचे थे। वहां उसके साथ दोनों ने मारपीट की और दुष्कर्म किया। बाद में उसके जबरदस्ती कागज पर साइन करा लिए। इसके बाद दो लोगो को बुला हत्या करने के लिए कार में जबरजस्ती ले जा रहे थे। इस बीच यूपी 100 की गाड़ी आ गई थीं। जिस पर महिला को कचहरी रोड पर रास्ते मे छोड़कर फरार हो गए थें। इस घटना के बाद अपर पुलिस अधीक्षक और सीओ सिटी वहां पहुंचे थे। पुलिस अधिकारियों ने इस मामले में किसी तरह की कार्रवाई करने के बजाय घटना के साक्ष्य मिटा दिए थे। अस्पताल में लगे सीसीटीवी कैमरों की रिकॉर्डिंग गायब कर दी थीं। महिला आरोपियों के खिलाफ कार्रवाई के लिए दर-दर भटक रही थी। लेकिन, उसकी रिपोर्ट दर्ज नही की जा रही थी। जिस पर महिला ने मुख्यमंत्री की जनसभा स्थल पर जाकर पेट्रोल छिड़ककर खुद को आग लगाने का वीडियो वायरल कर दिया था। जिसके बाद पुलिस प्रशासन में हड़कंप मच गया था। आनन फानन में गंज पुलिस ने महिला की तहरीर पर तत्कालीन थाना प्रभारी रामवीर सिंह यादव ,विनोद सिंह यादव, मनोज और विजय के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कर ली थीं। जिसके बाद मामलें की विवेचना की जा रही थी। पुलिस ने अस्पताल संचालक विनोद सिंह यादव, मनोज और विजय को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया। जेल में बंद तीनों आरोपियों ने अपने अधिवक्ता के माध्यम से जिला जज की कोर्ट में जमानत प्रार्थना पत्र दाखिल किया। जिस पर सुनवाई हुई। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि आरोपियों को झूठा फंसाया गया है। घटना का स्वतंत्र गवाह नही है। जबकि, जिला शासकीय अधिवक्ता अरुण कुमार सक्सेना ने तर्क दिया कि आरोपियों ने एक राय मशविरा होकर महिला के साथ घटना को अंजाम दिया है। जिसके साक्ष्य पत्रावली पर मौजूद है। दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद प्रभारी जिला जज नीलू मोघा ने विनोद सिंह यादव, मनोज और विजय का जमानत प्रार्थना पत्र निरस्त कर दिया हैं।