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Azam Khan News: सेशन कोर्ट में अपील दायर करने की तैयारी में आजम खां, कानून के जानकारों से ले रहे सलाह

Fri, 28 Oct 2022 10:01 PM IST
विजय पुंडीर अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर

सार

आजम खां को सजा सुनाए जाने के बाद उनके वकीलों ने फैसले की कॉपी लेकर उसका अध्ययन करना शुरू कर दिया है। सूत्रों की माने तो आजम खां कानून के जानकारों के संपर्क में हैं और उनसे राय-मशविरा ले रहे हैं।
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रामपुर कोर्ट से बाहर आते आजम खां - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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नफरती भाषण दिए जाने के मामले में निचली अदालत के फैसले को आजम खां सेशन कोर्ट में चुनौती देंगे। इसके लिए उन्होंने कानून के माहिरों से सलाह-मशविरा लेना शुरू कर दिया है। उम्मीद है कि जल्द ही आजम खां की ओर से सेशन कोर्ट में अपील दाखिल की जाएगी।

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नफरती भाषण दिए जाने के मामले में एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) की कोर्ट ने आजम खां को तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद उनको अपील दाखिल होने तक उनको अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया था। आजम खां को सजा सुनाए जाने के बाद उनके वकीलों ने फैसले की कॉपी लेकर उसका अध्ययन करना शुरू कर दिया है। सूत्रों की माने तो आजम खां कानून के जानकारों के संपर्क में हैं और उनसे राय-मशविरा ले रहे हैं। इसको लेकर उन्होंने हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट के वकीलों से भी राय ली है। ताकि पुख्ता तथ्यों के साथ इस फैसले को सेशन कोर्ट में चुनौती दी जा सके। 

शुक्रवार को आजम खां के अधिवक्ताओं ने मुकदमे से संबंधित अभिलेख लिए और उनका अध्ययन किया। आजम खां इस मामले कोई कोर कसर नहीं उठा रखना चाह रहे हैं। क्योंकि कोर्ट के फैसले से उनके सियासी कॅरिअर पर संकट के बादल मंडरा रहे हैं। दो साल से अधिक की सजा होने की स्थिति में उनकी विधानसभा की सदस्यता संकट में है। अपील के फैसले पर ही उनके सियासी सफर का भविष्य तय होगा।

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आजम खां के खिलाफ दर्ज मुकदमे में रिटायर्ड नायब तहसीलदार ने दी गवाही
सपा नेता आजम खां के खिलाफ टांडा थाने में एससी/एसटी एक्ट में दर्ज मुकदमे की सुनवाई के दौरान रिटायर्ड नायब तहसीलदार ने अपने बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष की ओर से उनसे जिरह की गई। उनकी गवाही पूरी हो गई है। इस मामले की अगली सुनवाई शनिवार को होगी। शनिवार को होने वाली सुनवाई के दौरान आजम खां के भाषण की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनी जाएगी। गवाह रिटायर्ड नायब तहसीलदार से कोर्ट सवाल जवाब करेगी। 

मामला साल 2007 का है। विधानसभा चुनाव के प्रचार को दौरान आजम खां ने एक जनसभा को संबोधित किया था। जनसभा के बाद बसपा नेता धीर कुमार शील ने थाने तहरीर देकर मुकदमा दर्ज कराया था कि आजम खां ने अपने भाषण में जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया है। तहरीर के बाद पुलिस ने इस मामले में रिपोर्ट दर्ज कर ली थी। पुलिस ने विवेचना के बाद कोर्ट में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। जिसके बाद कोर्ट ने 30 अक्तूबर 2021 को आजम खां पर आरोप तय कर दिए थे। इस मामले में आजम खां की जमानत पहले ही मंजूर हो चुकी है। इस मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट सेशन ट्रायल में चल रही है। शुक्रवार को हुई सुनवाई के दौरान टांडा के तत्कालीन नायब तहसीदार गुलाब राय ने अपने बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष की ओर से उनसे जिरह की गई। उनकी जिरह पूरी हो गई है। इस मामले की अगली सुनवाई शनिवार को होगी। शनिवार को कोर्ट रूम में आजम खां के भाषण की ऑडियो रिकॉर्डिंग सुनी जाएगी। सुनवाई के दौरान गवाह को भी उपस्थित रहने के आदेश दिए गए हैं।

अब्दुल्ला के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले में कन्नौज के एडीएम ने दी गवाही
सपा नेता आजम खां के पुत्र विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मामले शुक्रवार को कन्नौज के एडीएम गजेंद्र कुमार ने अपने बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की। उनकी जिरह पूरी नहीं हो सकी है। अब इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी।

विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र होने का मुकदमा 2019 में थाना गंज में दर्ज हुआ था। इस मुकदमे आजम खां, उनकी पत्नी डॉ. तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम आरोपी हैं। तीनों जमानत पर चल रहे हैं। मामले की सुनवाई एमपी-एमएलए कोर्ट (मजिस्ट्रेट ट्रायल) में चल रही है। शुक्रवार को कन्नौज में तैनात एडीएम और स्वार विधानसभा सीट के तत्कालीन आरओ गजेंद्र कुमार ने अपने बयान दर्ज कराए। बचाव पक्ष के अधिवक्ता ने उनसे जिरह की। जिरह पूरी नहीं हो सकी। इस मामले की अगली सुनवाई 31 अक्तूबर को होगी। सुनवाई के दौरान मुकदमे के वादी आकाश सक्सेना भी मौजूद रहे।

विधानसभा के प्रमुख सचिव को मेल से भेजी थी कोर्ट फैसले की सूचना
सपा नेता आजम खां के खिलाफ आए कोर्ट के फैसले की जिला निर्वाचन अधिकारी और डीएम रविंद्र कुमार मांदड़ ने विधानसभा के प्रमुख सचिव और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को मेल से भेजी गई थी। मेल के साथ कोर्ट फैसले की कॉपी भी भेजी गई। डीएम ने बताया कि एक विधायक के खिलाफ कोर्ट का फैसला आने पर अग्रेतर कार्रवाई के लिए विधानसभा के प्रमुख सचिव और मुख्य निर्वाचन अधिकारी को सूचना अनिवार्य है।

बृहस्पतिवार को एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) की कोर्ट ने रामपुर नगर सीट से सपा के विधायक आजम खां को नफरती भाषण देने के मामले में तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई है। सजा सुनाए जाने के बाद आजम खां को अपील दाखिल करने तक अंतरिम जमानत पर रिहा कर दिया गया। सुप्रीम कोर्ट की रूलिंग के मुताबिक दो साल से अधिक की सजा होने पर विधायक और सांसद की सदस्यता समाप्त हो जाती है। जिलाधिकारी की ओर से भेजी गई सूचना के आधार पर ही आजम खां की विधानसभा सदस्यता रद्द कर दी गई है।

निर्वाचन कार्यालय को सौंपी गई आजम खां नफरती भाषण की सीडी
आजम खां ने मिलक कोतवाली क्षेत्र के खाता नगरिया गांव में 07 अप्रैल 2019 को जो नफरती भाषण दिया था उसकी सीडी शुक्रवार को निर्वाचन कार्यालय को सौंप दी गई। सहायक निर्वाचन अधिकारी ने कोर्ट से सीडी प्राप्त की है। बृहस्पतिवार को नफरती भाषण के मामले में कोर्ट ने आजम खां को तीन साल की कैद और छह हजार रुपये जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई थी। कोर्ट ने अपने आदेश में कहा है कि विवादित भाषण की मूल हार्ड डिस्क निर्वाचन कार्यालय को सौंप दी जाए। निर्वाचन कार्यालय हार्ड डिस्क को अपील की अवधि तक सुरक्षित रखे। कोर्ट ने कहा है कि हार्ड डिस्क के बारे में कोई फैसला अपीलीय न्यायालय के स्तर से लिया जाएगा। कोर्ट के आदेश के अनुपालन में सहायक निर्वाचन अधिकारी हार्ड डिस्क प्राप्त कर ली है।
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अनवार और सालीम की जमानत खारिज
सपा विधायक अब्दुल्ला आजम के करीबी माने जाने वाले अनवार और सालीम की जमानत की अर्जी कोर्ट ने खारिज कर दी है। दोनों के खिलाफ जुआ खेलने और धोखाधड़ी के आरोप में सिविल लाइंस कोतवाली में मुकदमा दर्ज हैं। जुलाई माह में कुछ लोगों के जुआ खेलने का वीडियो वायरल हुआ था। वीडियो वायरल होने के बाद सिविल लाइंस पुलिस ने 16 जुलाई को वीडियो के आधार पर अज्ञात के खिलाफ मुकदमा दर्ज कर लिया था।

पुलिस ने मामले की तफ्तीश की तो सामने आया जुआ खेलने वाले कोई और नहीं बल्कि सपा विधायक अब्दुल्ला आजम के करीबी अनवार व सालिम थे। पुलिस ने उनकी तलाश शुरू की और फिर 19 सितंबर को उनको पकड़ लिया। पुलिस ने इस मामले में उनको जेल भेज दिया था। जेल में बंद दोनों आरोपियों की ओर से सेशन कोर्ट में जमानत के लिए प्रार्थना पत्र दाखिल किया, जिस पर सुनवाई हुई। सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से सहायक शासकीय अधिवक्ता सीमा राणा ने दलील दी कि आरोपी लोग जुए का अड्डा चलाते हैं और वह लोगों से इसके नाम पर धनराशि भी हड़प कर लेते हैं। उन्होंने दोनों की जमानत याचिका खारिज करने की मांग की। बचाव पक्ष के अधिवक्ता की ओर से तर्क दिया कि आरोपी को झूठा फंसाया गया है। इसलिए जमानत दी जाए। एडीजीसी ने बताया कि दोनों पक्षों की दलील सुनने के बाद एडीजे प्रथम वेद प्रकाश वर्मा की कोर्ट ने अनवार व सालिम की जमानत याचिका खारिज कर दी।
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