दो जन्म प्रमाणपत्र मामले में सात-सात साल की सजा होने के बाद अब सपा नेता आजम की सियासी विरासत पर ग्रहण लग गया है। क्योंकि आजम खां, अब्दुल्ला आजम के साथ-साथ अब तजीन फात्मा को सजा हो चुकी है। उनके परिवार में अब बड़ा बेटा अदीब आजम और बहू सिदरा अदीब हैं।
सपा नेता आजम खां के करीब 45 साल पुराने सियासी कॅरिअर पर ग्रहण लग चुका है। उनके साथ-साथ अब्दुल्ला आजम और डॉ. तजीन फात्मा को भी सजा हो चुकी है। ऐसे में से तीनों में कोई चुनाव नहीं लड़ पाएगा।
ऐसे में सवाल उठता है कि आजम की सियासी विरासत को कौन संभालेगा। उनके बड़े पुत्र अदीब आजम अभी सियासत में पूरी तरह से सक्रिय नहीं है। बहू सिदरा अदीब को भी आजम खां ने सियासत में उतरने की इजाजत नहीं दी।
सपा नेता आजम खां का करीब 40 साल पुराना सियासी कॅरियर अब ढलान पर आ चुका है। वह दस बार विधायक, एक दफा सांसद और एक दफा राज्यसभा सदस्य भी रह चुके हैं। इसके साथ ही चार दफा कैबिनेट मंत्री और एक दफा नेता विरोधी दल भी रह चुके हैं।
सपा सरकार में यूपी के मिनी मुख्यमंत्री कहलाए जाने वाले आजम खां सपा सरकार जाने के बाद भाजपा सरकार आने से ही विरोधियों के निशाने पर आ गए थे। लोकसभा चुनाव के दौरान वह कई केसों में घिरते हुए चले गए।
आजम के खिलाफ सौ से ज्यादा मामले दर्ज हैं, कई मामलों में कोर्ट फैसला सुना चुकी है। कोर्ट में आजम खां को हेट स्पीच के दो मामलों और छजलैट प्रकरण में भी उनको सजा सुनाई जा चुकी है। हेट स्पीच के एक मामले में वह बरी हो चुके हैं, जिसमें सरकार की ओर से हाईकोर्ट में अपील दायर की जा चुकी है।
बुधवार को आजम को सात साल की सजा सुनाई गई। उनको अब तक चार केस में सजा सुनाई जा चुकी है, जिसमें से एक मामले में वह कोर्ट से बरी भी हुए हैं। सात साल की सजा सुनाए जाने के बाद अब उनके सियासी कॅरियर पर और ज्यादा संकट के बादल मंडराने लगे हैं।
अब सियासी गलियारों में यह सवाल उठ रहा है कि अब उनके परिवार से सियासी वारिस कौन होगा? हालांकि उनके बड़े बेटे अदीब आजम खां सियासत से दूर रहते हैं। अब सियासी वारिस की तलाश में पार्टी जुट गई है।
आजम खां, अब्दुल्ला और डॉ. फात्मा को सात-सात साल की कैद की सजा
सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र होने के मामले में एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) कोर्ट ने सपा नेता आजम खां, उनकी पत्नी पूर्व विधायक डॉ. तजीन फात्मा और पुत्र अब्दुल्ला आजम को सात-सात साल कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर 50 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला जेल भेज दिया गया।
भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र होने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि अब्दुल्ला आजम का एक जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से बना है और दूसरा रामपुर नगरपालिका परिषद् से। इस मुकदमे में अब्दुल्ला के पिता सपा नेता आजम खां और उनकी मां पूर्व विधायक डॉ. तजीन फात्मा को भी आरोपी बनाया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। तीनों इस मुकदमे में जमानत पर चल रहे थे।
मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) शोभित बंसल की कोर्ट में हुई। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोपहर के वक्त आजम खां, अब्दुल्ला और तजीन फात्मा को दोषी करार दिया। इसके बाद तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया। दोपहर बाद कोर्ट ने सजा का एलान किया, जिसमें आजम खां, अब्दुल्ला आजम और डॉ. तजीन फात्मा को सात-सात साल की कैद और 50 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच रामपुर के जिला कारागार में भेज दिया गया ।
अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मुकदमे में कब क्या हुआ
मुकदमा दर्ज हुआ- 3 जनवरी 2019
आरोप पत्र दाखिल- 01 अप्रैल 2019
आरोप पत्र पर कोर्ट ने संज्ञान लिया- 19 अगस्त 2019
जमानत स्वीकृत- 13 अक्तूबर 20
आरोपियों पर आरोप तय हुए- 18 अगस्त 2021
आरोपियों के बयान दर्ज- 17 मार्च 2023
बहस- 11 अक्तूबर 2023
बचाव पक्ष की अंतिम लिखित बहस दाखिल- 17 अक्तूबर 2023
निर्णय- 18 अक्तूबर 2023
किस धारा में कितनी सजा
धारा सजा
120-बी एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना
आईपीसी की धारा 420 तीन वर्ष का कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी की धारा 467 सात वर्ष का कारावास और पंद्रह हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी की धारा 468 तीन वर्ष का कारावास व दस हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी की धारा 471 दो वर्ष का कारावास व दस हजार रुपये जुर्माना
नोट- सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।