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Azam Khan News: आजम खां 17 माह बाद फिर सलाखों के पीछे, शौहर और बेटे अब्दुल्ला के बाद अब डॉ. तजीन भी सजायाफ्ता

Thu, 19 Oct 2023 10:34 AM IST
शाहरुख खान अमर उजाला नेटवर्क, रामपुर

सार

राजकीय महिला स्नातकोत्तर के साथ ही राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय समेत प्रदेश के कई महाविद्यालयों में राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर रह चुकीं डा.तजीन फात्मा अब धोखाधड़ी और अपराधिक षडयंत्र रचने की सजायाफ्ता कैदी बन चुकी हैं। उन्हें कोर्ट ने पहली दफा दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई है।
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Azam Khan News - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सपा के पूर्व विधायक अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र होने के मामले में एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) कोर्ट ने सपा नेता आजम खां, उनकी पत्नी पूर्व विधायक डॉ. तजीन फात्मा और पुत्र अब्दुल्ला आजम को सात-सात कैद की सजा सुनाई है। कोर्ट ने तीनों पर 50 रुपये का जुर्माना भी लगाया है। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों न्यायिक अभिरक्षा में लेकर जिला जेल भेज दिया गया।
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भाजपा विधायक आकाश सक्सेना ने 2019 में गंज थाने में अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र होने के आरोप में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। आरोप है कि अब्दुल्ला आजम का एक जन्म प्रमाणपत्र लखनऊ नगर निगम से बना है और दूसरा रामपुर नगरपालिका परिषद् से। इस मुकदमे में अब्दुल्ला के पिता सपा नेता आजम खां और उनकी मां पूर्व विधायक डॉ. तजीन फात्मा को भी आरोपी बनाया गया था। विवेचना के बाद पुलिस ने इस मामले में चार्जशीट दाखिल कर दी थी। तीनों इस मुकदमे में जमानत पर चल रहे थे।

मुकदमे की सुनवाई एमपी-एमएलए (मजिस्ट्रेट ट्रायल) शोभित बंसल की कोर्ट में हुई। बुधवार को सुनवाई के दौरान कोर्ट ने दोपहर के वक्त आजम खां, अब्दुल्ला और तजीन फात्मा को दोषी करार दिया। इसके बाद तीनों को न्यायिक अभिरक्षा में ले लिया। दोपहर बाद कोर्ट ने सजा का एलान किया, जिसमें आजम खां, अब्दुल्ला आजम और डॉ. तजीन फात्मा को सात-सात की कैद और 50 हजार रुपये का जुर्माना अदा करने की सजा सुनाई गई। सजा सुनाए जाने के बाद तीनों को कड़ी सुरक्षा के बीच रामपुर के जिला कारागार में भेज दिया गया ।
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एक साल पांच माह बाद फिर सलाखों के पीछे पहुंचे आजम
सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां, उनकी पत्नी डा.तजीन फात्मा और अब्दुल्ला आजम ने कोर्ट से कुर्की का वारंट जारी होने के बाद 26 फरवरी 2020 रामपुर की कोर्ट में सरेंडर कर दिया था। तीनों को रामपुर की जेल भेज दिया था। एक दिन के बाद ही सुरक्षा कारणों से तीनों को सीतापुर की जेल भेज दिया गया था। 

आजम खां करीब 17 माह जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। इससे पहले उनकी पत्नी डा.तजीन फात्मा 21 दिसंबर 2021 को जेल से रिहा हुईं थी। अब्दुल्ला आजम 15 जनवरी 22 को सीतापुर जेल से जमानत पर रिहा हुए थे। अब आजम परिवार एक बार फिर सजायाफ्ता होने के बाद रामपुर जेल पहुंच गया है।

प्रोफेसर से अब सजायाफ्ता हो गईं डा. तजीन फात्मा
राजकीय महिला स्नातकोत्तर के साथ ही राजकीय रजा स्नातकोत्तर महाविद्यालय समेत प्रदेश के कई महाविद्यालयों में राजनीति शास्त्र की प्रोफेसर रह चुकीं डा.तजीन फात्मा अब धोखाधड़ी और अपराधिक षडयंत्र रचने की सजायाफ्ता कैदी बन चुकी हैं। उन्हें कोर्ट ने पहली दफा दोषी मानते हुए सात साल की सजा सुनाई है।
 

उम्र के विवाद में ही जा चुकी है अब्दुल्ला की विधायकी
उम्र के विवाद में अब्दुल्ला आजम की विधायकी 2019 में जा चुकी है। अब्दुल्ला 2017 में स्वार से चुनाव लड़े थे। इस सीट से उनके मुकाबले बसपा से चुनाव लड़े नवाब काजिम अली खां उर्फ नवेद मियां ने उनके निर्वाचन को हाईकोर्ट में चुनाव याचिका दायर कर चुनौती दी थी। 

उन्होंने आरोप लगाया था कि अब्दुल्ला नामांकन पत्र दाखिल करते समय तक न्यूतनम आयु की शर्त को पूरा नहीं करते थे। हाईकोर्ट ने 16 दिसंबर 2019 को अब्दुल्ला को विधायकी निरस्त कर दी। अब्दुल्ला ने हाईकोर्ट के इस आदेश को सुप्रीम कोर्ट में भी चुनौती थी। सुप्रीम कोर्ट ने भी अब्दुल्ला के याचिका को खारिज कर हाईकोर्ट के आदेश को बहाल रखा था। 
 

आजम बोले: फैसला हुआ है इंसाफ नहीं
कोर्ट परिसर से बाहर आने के बाद सपा के वरिष्ठ नेता आजम खां कहा कि फैसला हुआ है इंसाफ नहीं। फैसले और इंसाफ में फर्क होता है। कहा कि एक दिन पहले से पूरे शहर को पता था कि सजा हो रही है। हमें भी पता था कि सजा हो रही है। इस फैसले को चुनौती देने के सवाल पर उन्होंने कहा कि हम इस फैसले के खिलाफ अपील करेंगे। 

अब्दुल्ला आजम के दो जन्म प्रमाणपत्र के मुकदमे में कब क्या हुआ
मुकदमा दर्ज हुआ- 3 जनवरी 2019
आरोप पत्र दाखिल- 01 अप्रैल 2019
आरोप पत्र पर कोर्ट ने संज्ञान लिया- 19 अगस्त 2019
जमानत स्वीकृत- 13 अक्तूबर 20
आरोपियों पर आरोप तय हुए- 18 अगस्त 2021
आरोपियों के बयान दर्ज- 17 मार्च 2023
बहस- 11 अक्तूबर 2023
बचाव पक्ष की अंतिम लिखित बहस दाखिल- 17 अक्तूबर 2023
निर्णय- 18 अक्तूबर 2023
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किस धारा में कितनी सजा
धारा                                     सजा
120-बी                         एक वर्ष का कारावास और पांच हजार रुपये का जुर्माना
आईपीसी की धारा 420             तीन वर्ष का कारावास और दस हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी की धारा 467             सात वर्ष का कारावास और पंद्रह हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी की धारा 468             तीन वर्ष का कारावास व दस हजार रुपये जुर्माना
आईपीसी की धारा 471             दो वर्ष का कारावास व दस हजार रुपये जुर्माना
नोट- सभी सजाएं एक साथ चलेंगी।
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