समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता आजम खां ने अपने खिलाफ हुई कार्रवाइयों को जुल्म बताया। कहा कि मुल्क के वजीर-ए-आजम और गृहमंत्री साहब मैं आपको बताना चाहता हूं कि मुझे इस बात का भी अफसोस है कि आपकी इंटेलीजेंस बहुत कमजोर है। आपके जितने खुफिया महकमे हैं, वो नाकाम हैं। आप कैसे बचाएंगे दुश्मन से मुल्क को। जब आप मेरा नाम माफिया नंबर एक पर लेते हैं। नंबर दो पर मुख्तार अंसारी और नंबर तीन पर अतीक अहमद का नाम लेते हैं। उस वक्त पूरी दुनिया की इंसानियत शर्मिंदा हो जाती होगी। उस वक्त हिंदुस्तान की सारी इंटेलीजेंस कम से कम मेरी निगाह में फेल हो जाती हैं।
शुक्रवार रात टांडा में आयोजित चुनावी जनसभा को संबोधित करते हुए आजम खां ने जिगर मुरादाबादी के शेयर को याद करते हुए कहा कि गम की ऐसी कोई लंबी रात नहीं, जिसकी सुबह न हो। कहा कि मेरे और मेरे अपनों के साथ, मेरे शहर व जिले के साथ जो सलूक हुआ, वो मैं दावे के साथ कह सकता हूं कि पूरी दुनिया में किसी सियासतदां के साथ किसी हुकूमत ने इतना घटिया सलूक नहीं किया होगा।
कोई हुकूमत इतनी नहीं गिरी होगी कि हम पर शराब की दुकान लूटने और गल्ले से 16 हजार रुपये चोरी करने का मुकदमा दायर कर दिया। हम पर मुकदमा है कि जो सैकड़ों एकड़ जमीन आपके बच्चों के लिए दामन फैलाकर इदारा तामीर किया उसमें पौने चार बीघा जमीन कब्जा ली है। मैंने उन किसानों से पैसा लेने को कहा तो किसानों ने कहा कि अगर हमने रजिस्ट्री आपके नाम की तो हमारा हश्र आपसे भी बुरा किया जाएगा।
पांच माह की बीमारी के बाद मेरी क्या हालत थी, आपने तस्वीरों में देखा था। उस हालत में ईडी ने घंटों बिठाकर मुझसे पूछताछ की। मैंने कहा कि आप जो मुझसे सवालात कर रहे हैं उन पर मुझे गुस्सा नहीं आ रहा बल्कि शर्म आ रही है कि मैं कहां पैदा हुआ हूं। कहा कि देश की आजादी के बाद हिंदू-सिख भाई पाकिस्तान नहीं जा सकते थे पर हम जा सकते थे लेकिन, नहीं गए। क्योंकि यहां पर हमारे पूर्वजों की यादें हैं लेकिन, हमें ये पता नहीं था कि हमारे साथ यहां यह सलूक होगा कि हमारे खिलाफ मुर्गे, बकरी, भैंस, किताब और फर्नीचर की चोरी नहीं डकैती के मुकदमे होंगे। ये मयार है उस हुकूमत का।
कहा कि मैं बताना चाहता हूं मुल्क के वजीरे ए आजम और गृहमंत्री को उन तक पहुंचेंगी मेरी आवाज, ये तकरीर सुनी जा रही होगी कि मुझे इस बात का अफसोस है कि आपकी इंटेलीजेंस यही सलाह देती है कि मैं माफिया हूं, तो फिर हिंदुस्तान का मुस्तकबिल बहुत खतरे में है। हमने हर चीज बर्दाश्त की है। हमारे नबी की शान में तौहीन भी बर्दाश्त की है।
बाबरी मस्जिद और राम जन्म भूमि का मूवमेंट चला, तो हम उसके कन्वीनर थे। लेकिन एक तकरीर और एक बयान भी रामचंद्र जी, सीता जी, कृष्ण जी की तौहीन में हो, तो हम अपनी सजा खुद तय करेंगे। हमें हमारा मजहब रोकता है। हमारा अल्लाह, हमारा कुरआन रोकता है। हमें हमारा नबी रोकता है। वरना, जुबान हमारे भी मुंह में है, कहना हमें भी बहुत कुछ आता है।
लेकिन हमारा ये ईमान है कि जो हमारे प्यारे नबी की तौहीन करेगा, तो वो तबाह और बर्बाद हो जाएगा। मिट जाएगा। उन्होंने कहा कि अपनी तबाही का इंतजाम मत करो जालिमों। तुम्हें हिदायत है कि हमारे नबी के खिलाफ जो अल्फाज कहे हैं, उसे दोबारा मत कहना। तुम उस गुनाह के हिस्सेदार मत बनना। जिसके इश्क मैं अल्लाह ने पूरी कायनात बनाई हो, वो उसकी तौहीन बर्दाश्त नहीं करेगा।