राज कपूर जैसी होली अब कोई नहीं मनाता और न ही आज कोई नहीं मना सकता। सुभाष घई होली में भांग घोलते थे और अमिताभ हर आदमी को गले लगाते थे। रंगों से भरे टैंक में हर किसी को फेंक दिया जाता था।
उस होली में कोई भी बचकर नहीं निकल पाता था। अब होली तो वही है, लेकिन उसको मनाने के तरीके जरूर बदल गए हैं। कुछ इस तरह की भूली बिसरी यादें पांच सौ से ज्यादा फिल्मों में काम करने वाले रजा मुराद ने अमर उजाला के साथ शेयर कीं।
रजा मुराद बताते हैं पहले आर.के स्टूडियो में होली उत्सव शानदार तरीकेसे मनाई जाती। आर के स्टूडियो में होली उत्सव का मतलब भांग व फूड फेस्टिवल था। आर के स्टूडियो में अस्थायी रूप से कुंआ बनाया गया था। जिसमें हर किसी को डुबकी लगाने पर मजबूर कर दिया जाता था, जबरन इस कुएं में सबको डाला जाता था। मुझे पहली बार आर के स्टूडियो में जब होली में हिस्सा लेने का मौका मिला तो मैं तो खुशी से फूला नहीं समाया था। कई सालों तक आरके स्टूडियो में होली का जश्न मनाया गया।
राजकपूर की होली बॉलीवुड ही नहीं बल्कि हॉलीवुड तक पसंद की जाती रही। हर किसी कलाकार की तमन्ना होती थी कि आरके की होली जरूर खेली जाए। उन्हें यहां पर होली खेलने का कई दफा मौका मिला। बिग बी अमिताभ बच्चन जैसे कलाकार भी यहां अलग ही नजर आते थे। समय के साथ ही होली मनाने के तरीके भी बदल गए। अब न तो आरके जैसी होली कहीं दिखती है।