रामपुर। शहीदे करबला के सोयम पर गमगीन माहौल में जरी और जुलजुनाह का जुलूस निकला। अंजुमनों ने नोहाख्वानी और अजादारों ने मातम किया। अजाखानों में मजलिस का भी सिलसिला जारी रहा।
करबला में हजरत इमाम हुसैन के शहीद हो जाने के बाद खून में नहाए घोड़े ने ही उनकी शहादत की खबर खेमों तक पहुंचाई थी। सोयम पर इमामबाड़ा खासबाग से मेहंदी और जुलजुनाह का जुलूस निकला। पूर्व सांसद बेगम नूरबानो ने जुलूस को रवाना किया। जुलूस को पुलिस के जवानों ने गार्ड आफ आनर दिया। जुलजुनाह अमरोहा की अंजुमन सादात की ओर से लाया गया था। मुकामी अंजुमनों ने नोहे पढ़े- असलम महमूद, ईशान बिट्टन जैदी, हैदर अब्बास, कायम मेहंदी ने भी नोहा पढ़ा-बोली सुगरा दुहाई नबी की, यूं भी उजड़े न खेती किसी की। खेमे जले आग लगी, लाल मेरे शाम हुई। जुलूस फोटो चुंगी रोड पर पहुंचा तो यहां भी नोहे पढ़े। जुलूस सीआरपीएफ से होकर करबला पहुंचा। अजादारों ने यहां भी मातम किया और अजुमनों ने नोहे पढ़े। अलविदा हो अलविदा, मेरे गरीब अलविदा। बाद में मेहंदी करबला में सुपुर्देखाक कर दी गई। इससे पहले इमामबाड़ा खासबाग में मौलाना अली नकी नौगवीं ने मजलिस को खिताब किया।
जुलूस में आरिफ मुंसरिम, गुलरेज खां, इरफान जैदी, शबाब हुसैन, हसीन हुसैन, अजीम मियां, वसीम मियां, एस कमल जैदी, राशिद, इकबाल मेहंदी, मुन्ने, मेहंदी हुसैन, मुन्ने भी थे। मौलाना नामदार अब्बास रिजवी ने इमामबाड़ा मिर्जा मोहम्मद जफर बेग लालबकर में मजलिस पढ़ी। उन्होंने कहा कि इस्लाम अमन और भाईचारे का पैगाम देता है। जो हुसैन का गम मना रहे हैं उन्हें हुसैन का पैरोकार होना चाहिए। हुसैन की हिदायतों पर अमल करने की ताकीद की।