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विकारों का त्याग करना है उत्तम त्याग

Tue, 17 Sep 2013 05:38 AM IST
Rampur
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रामपुर। पयूर्षण पर्व का आठवां दिन उत्तम त्याग के रूप मनाया गया। उत्तम त्याग का मतलब हमारे अंदर जो राग द्वेष रूपी विकास है उसका त्याग कर अपनी आत्मा को निर्मल बनाना। सोमवार को प्रात: श्री जी का अभिषेक पुजारियों द्वारा किया गया। पार्श्वनाथ की पूजा संगीत के साथ की गई, जिसमें महिलाओं एवं पुरुषों ने भाव नृत्य किया।
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इसके बाद पंडित नयन जैन शास्त्री व राहुल भैय्या द्वारा सूत्र का वाचन किया गया। शाम को सामूहिक आरती हुई। इस मौके पर जितेंद्र जैन, शिखर जैन, श्रीयांश जैन, रमेश जैन, अजय जैन, देवेंद्र कुमार जैन, विशाल जैन, नितेश जैन, सुभाष जैन, डा. सुमेर चंद जैन, अंकुर जैन, नरेश जैन, नमन जैन, अक्षय जैन, नितिन जैन, भारत भूषण जैन, अंजू जैन, शशि जैन, उर्मिला जैन, कांति जैन, निर्मला जैन, लीना जैन, सीमा जैन, सोनिया जैन, प्रीति जैन, प्रिया जैन, पारुल जैन, सुमन जैन, नीलम जैन, रेखा जैन, शिखा जैन, अर्चना जैन, रुकमणि जैन सहित अन्य कई लोग मौजूद रहे। रविवार की रात स्व. महेंद्र कुमार जैन की स्मृति में सुर आराधाना कार्यक्रम में दो वर्गो में प्रतियोगिता हुई। दूसरी ओर आदिनाथ दिगंबर जैन मंदिर में भी उत्तम त्याग का दिन मनाया गया। शाम को आरती के बाद लक्की ड्रा का आयोजन हुआ। तत्पश्चात ऋषभ जैन ने रात्रि भोजन त्याग पर अपना विचार व्यक्त किया। शास्त्री मयंक जी ने कहा कि जिन बाह्य कारणों से आत्मा में विकार पैदा हो रहा है, उनका परित्याग करना त्याग है। इस मौके पर डा. एस जैन, विनोद बिहारी, रास बिहारी, आलोक जैन, मुकेश जैन, संजय जैन, डा. जीके जैन, दिेनेश, संजय खंडेलवाल, सर्वेश जैन, रमेश, वीरेंद्र, सुरेश जैन आदि मौजूद रहे।
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