रामपुर। 67 साल पहले अंग्रेज भारत छोड़कर तो चले गए लेकिन उनकी ‘गुलामी’ से आज तक भारतीय आजाद नहीं हो सके हैं। अंग्रेजों की सहूलियत के अनुसार बने कानूनों को बेड़ी में अभी भी भारतीय जकड़े जा रहे हैं। डेढ़ सौ साल पहले बने ये कानून आधुनिकता के इस युग में अप्रासंगिक हो चुके हैं लेकिन देश के हुक्मरान अभी तक स्वदेशी कानून नहीं बना सके।
तीन सौ सालों तक देश में अपनी हुकूमत चलाने वाले फिरंगियों ने सबकुछ अपनी मनमर्जी से किया। मसलन, उस वक्त मोटर कारें बस अंग्रेजों के पास ही होती थीं। इसके चलते जो एमवी एक्ट बनाया गया उसके तकरीबन सारे प्रावधानों को थाने से ही ‘जमानती अपराध’ की श्रेणी में रखा गया। मारपीट या धमकी जैसे मामलों पर सख्ती दिखाई गई। शांति भंग को अंग्रेजों ने एक ऐसा हथियार बनाया जिससे किसी पर भी पुलिस का चाबुक चल सकता है। ये चाबुक आज भी भारतीयों को लहूलुहान कर रही है। ‘सरकारी कार्य में बाधा’ भी एक ऐसी ही धारा थी जिसके शिकंजे में किसी को भी बगैर जांच पड़ताल के लिया जा सकता था। संपत्ति या भूमि अधिग्रहण को लेकर बने कानूनों की भी यही स्थिति थी।