मोहन मेहता
ज्यूरी(रामपुर बुशहर)।
मुख्यमंत्री के घर में सुशासन की धज्जियां उड़ रही हैं। पहला रामपुर बुशहर के दोफदा स्कूल में और दूसरा मामला बिजली बोर्ड का सामने आया है। वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला दोफदा में एक अध्यापिका डेपुटेशन पर ऊना गई है, जिसका वेतन दोफदा से और अब बिजली बोर्ड के सराहन सब डिवीजन के एक सीनियर असिस्टेंट करीब 8 माह से रामपुर डिवीजन में सेवाएं दे रहा है, जहां पहले से स्टाफ की कोई कमी नहीं है, जबकि सराहन सब डिवीजन में फील्ड और ऑफिस स्टाफ के दो दर्जन पद खाली पड़े हैं। बिजली उपभोक्ताओं को 6 से 8 महीने के बाद भारी भरकम बिल थमाए जा रहे हैं, जिस से गरीब लोगों को एक साथ हजारों के बिल जमा करवाने पड़ रहे हैं।
बिजली के स्लैब के हिसाब से कुछ यूनिटों के बाद ज्यादा रेट लगता है और उपभोक्ताओं को इसका नुकसान भी झेलना पड़ रहा है। हालत यह है कि आज बिल बांटे जा रहे हैं और अगले दिन बिल जमा करवाने की डेट है। कई क्षेत्रों में बिजली गुल होने और फ्यूज लगाने वाला और लाइन ठीक करने वाला भी कोई नहीं है। ऐसे में उपभोक्ताओं को खुद बिजली की सप्लाई चलाने के काम करना पड़ता है, जिसके चलते सराहन के मझगांव में दो महीने पहले खुद बिजली की तार ठीक करते हुए एक युवक की करंट लगने से मौत भी हो चुकी है।
उधर, बिजली बोर्ड रामपुर डिवीजन के एक्सईएन डीसी भारद्वाज ने माना कि स्टाफ की कमी भी है और सराहन का सीनियर असिस्टेंट भी रामपुर डिवीजन में कार्य कर रहा है। इस बारे में बिजली बोर्ड के पीआरओ अनुराग पराशर से ने कोई जवाब नहीं दिया।