रामपुर। मारपीट के मामले में आंगनबाड़ी कार्यकत्री को हिरासत में लेने पर आंगनबाड़ी कार्यकत्रियां भड़क गईं। उनहोंने सिविल लाइंस थाने पहुंचकर हंगामा किया और फिर बाद में हिरासत में ली गई कार्यकत्री को छुड़वा लिया। इस घटना से कार्यकत्रियों में आक्रोश है। उनका कहना है कि सुपरवाइजर ने आंगनबाड़ी कार्यकत्री को झूठा फंसाया है।
पिछले दिनों चमरौवा विकास खंड कार्यालय में सुपरवाइजर और आंगनबाड़ी कार्यकत्री केबीच विवाद हो गया था। इस विवाद केबाद सुपरवाइजर माया देवी ने आंगनबाड़ी कार्यकत्री उर्मिला समेत अन्य के खिलाफ सिविल लाइंस थाने में मारपीट व सरकारी कार्य में बाधा डालने का मुकदमा दर्ज कराया था। पुलिस ने मामले की रिपोर्ट दर्ज करने के बाद मामले की जांच शुरू कर दी थी। सोमवार को आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों की आंबेडकर पार्क में मीटिंग चल रही थी। इस बीच कार्यकत्रियों को सूचना मिली कि पुलिस ने आंगनबाड़ी कार्यकत्री को हिरासत में ले लिया। इस सूचना के बाद कायऱकत्रियां सिविल लाइंस थाने पहुंच गईं,जहां पर कार्यकत्रियों ने हंगामा शुरू कर दिया। उनका कहना था कि सुपरवाइजर ने झूठा मुकदमा दर्ज कराया है। पुलिस ने झूठे मुकदमे के आधार पर पकड़ा है। कहा कि पुलिस सुपरवाइजर के दवाब में काम कर रही है। बाद में काफी देर के बाद हिरासत में ली गई कार्यकत्री को संगठन के लोग अपने साथ ले गए। संगठन की जिलाध्यक्ष मिथलेश चौधरी का कहना है कि सूचना मिलने के बाद कार्यकत्री पहुंची थीं,जहां पर इसका विरोध किया गया। इस दौरान काफी संख्या में कार्यकत्री मौजूद रहीं।