रामपुर। नवरात्र में व्रत के दौरान कुट्टू के आटे की पकौड़ी और पराठा खाने से फूड पॉइजनिंग के शिकार हुए 51 लोग जिला अस्पताल पहुंचे। रविवार रात 11 बजे से सोमवार दोपहर तीन बजे तक मरीजों के पहुंचने का सिलसिला जारी रहा। इनमें 39 मरीजों की तबीयत में सुधार होने के बाद छुट्टी दे दी गई, जबकि 12 मरीजों का उपचार अभी चल रहा है। भर्ती मरीजों में छह पुरुष और छह महिलाएं शामिल हैं। दो बच्चों समेत एक ही परिवार के पांच लोग भी अस्पताल में भर्ती हैं।
नवरात्र में कुट्टू का आटा खाने से 51 लोगों के बीमार पड़ने के बाद खाद्य सुरक्षा विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठने लगे हैं। मरीजों के परिजनों ने आरोप लगाया कि विभाग पूरे साल खाद्य पदार्थों की जांच के नाम पर खानापूर्ति करता है। इसके बावजूद बाजार में बिक रहे कुट्टू के आटे की गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं हो पा रही है। उन्होंने खराब खाद्य पदार्थों की बिक्री के पीछे विभागीय मिलीभगत का आरोप लगाया।
उन्होंने कहा कि नवरात्र में व्रत रखने वाले श्रद्धालु कुट्टू और सिंघाड़े के आटे का इस्तेमाल करते हैं। इस दौरान इसकी मांग बढ़ जाती है। ऐसे में आटे की गुणवत्ता की जांच और बिक्री पर निगरानी की जिम्मेदारी खाद्य सुरक्षा विभाग की है। माना जा रहा है कि नवरात्र संपन्न होने के बाद बचा हुआ आटा दुकानदार रख देते हैं हैं, लालच के कारण उसे हटाने के बजाय अगले वर्ष बेचते हैं। अधिक दिनों तक रखे रहने से कुट्टू के आटे की गुणवत्ता खराब हो जाती है जिसका नतीजा फूड पॉइजनिंग के रूप में सामने आता है। इसी कारण सोमवार को भी कुट्टू का आटा खाने से किसी को पेट में दर्द तो किसी को उल्टी दस्त शुरू हो गई।
जिला अस्पताल में ये मरीज हुए भर्ती
रामपुर। जिला अस्पताल में कुट्टू के आटे की रोटी खाने से हुई फूड पॉइजनिंग के बाद रोशनी-27, मनोज-30, पूनम-26, हरिशंकर-29, संतोष-45 , अंजलि-26, राखी-24, कोमल-24, विशेष-27, कैलाश-53, हीरालाल-60 और रिंकी 35 वर्ष को उपचार के लिए भर्ती कराया गया था। स्वास्थ्य सही होने के बाद इनमें से पांच मरीज घर चले गए।
जिला अस्पताल में भर्ती थाना भोट क्षेत्र के सनैया गांव निवासी मुकेश ने बताया कि रविवार की रात उन्होंने व्रत में अपने परिवार के साथ कुट्टू आटे के परांठे खाए थे। इसके बाद उनकी माता शकुंतला 52, पत्नी रिंकी 29, बेटी काव्या 11 और बेटा ऋषभ 08 की रात करीब 10 बजे तबीयत खराब हो गई। बताया कि तबीयत खराब होने पर पास के ही चिकित्सक के पास गए लेकिन वहीं से कोई आराम नहीं मिला। इसके बाद परिजन अस्पताल लेकर आए, जहां पर उपचार चल रहा है।
- कुट्टू की रोटी खाने के बाद परिवार के लोगों की तबीयत बिगड़ गई। उन्हें उल्टी और पेट दर्द की शिकायत हुई, जिसके बाद जिला अस्पताल लेकर आए। खाद्य सुरक्षा विभाग को बाजार में बिकने वाले आटे की गुणवत्ता की जांच करनी चाहिए, ताकि लोगों की सेहत से खिलवाड़ न हो।
- संजय कुमार, तीमारदार
व्रत में इस्तेमाल होने वाले कुट्टू के आटे से इतनी बड़ी संख्या में लोगों का बीमार होना चिंता की बात है। खाद्य सुरक्षा विभाग पूरे साल निगरानी करता है, फिर भी ऐसी घटनाएं हो रही हैं। विभाग को पता लगाना चाहिए कि आटा कहां से आया और इसकी गुणवत्ता कैसी थी। जांच में दोष मिलने पर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए।
- रामौतार, तीमारदार
मरीजों के तीमारदारों ने बताया कि कुट्टू के आटे का पराठा खाने के बाद फूड पॉइजनिंग हुई थी। मरीजों को अस्पताल में भर्ती कर उपचार किया जा रहा है। जिन मरीजों की हालत में सुधार हुआ, उन्हें छुट्टी दे दी गई है। भर्ती मरीजों की स्थिति पर नजर रखी जा रही है।
- डॉ. बीसी सक्सेना, सीएमएस,जिला अस्पताल
कुट्टू के आटे से लोगों के बीमार होने के मामले की जानकारी लेकर आवश्यक कार्रवाई की जा रही है। संबंधित आटे की बिक्री के स्रोत का पता लगाया जा रहा है। आटे में गड़बड़ी मिलने पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
- संजीव कुमार, कार्यवाहक मुख्य खाद्य सुरक्षा अधिकारी