रामपुर। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के उपलक्ष्य में दत्तराम शिवालय में चल रहे श्री राम कथा महोत्सव के पांचवे दिन काशी से पधारे संत शंभू नाथ व्यास ने कहा कि भगवान भक्त और भक्ति से मिलने स्वयं आते हैं। अपने हृदय को अयोध्या बनाओ प्रभु राम स्वयं आ जाएंगे। जो छल- कपट का त्याग कर देता है। वह प्रभु का कृपा पात्र बन जाता है।
राम विवाह से पूर्व की कथा सुनाते हुए उन्होंने कहा कि श्रीराम और माता सीता का मिलन पुष्प वाटिका में हुआ। राम अपने गुरु के लिए पुष्प लेने आए और सीता गौरी पूजा के लिए पुष्प वाटिका में आई। गुरु पुल्लिंग का प्रतीक है और गौरी स्त्रीलिंग का प्रतीक है। स्त्री संस्कृति का प्रतीक है। आज हमारी संस्कृति पर कुठाराघात हो रहा है। सीता स्वयंवर में श्रीराम ने अपने गुरु के आशीर्वाद से ही शिव धनुष तोड़ा था। जिस पर गुरु की कृपा होती है उसके लिए कुछ भी अजेय नहीं है। भगवान राम ने अपने सद आचरण ,सेवा समर्पण और मृदु व्यवहार से अपने गुरु को प्रसन्न किया। विनय और श्रद्धा में अद्भुत शक्ति होती है। इससे व्यक्ति को आयु, विद्या, यश और बल की प्राप्ति होती है । कथा के आरंभ में प्रदीप अग्रवाल में सपत्नीक पूजन अर्चन किया। इस अवसर पर मुनीश चंद्र शर्मा, सौरभ पाठक, विकास शर्मा,हरि ओम अग्रवाल, सूरज शर्मा, सतीश शर्मा,इज्य पाठक राधेश्याम यादव, सुनील अग्रवाल, अनिल शर्मा,मृदुल शर्मा, सुधा शर्मा, मीनाक्षी शर्मा,अभी शर्मा, गिरिराज शरण, राम आसरे गुप्ता, मनोज पाठक,पारुल पाठक, डॉक्टर आशीष पांडे उपस्थित रहे।