उर्दू से अधिक हिन्दी-अंग्रेजी बन रही मदरसों की पसंद
रामपुर।
सिर्फ सीबीएसई या कान्वेंट स्कूलों के बच्चे ही नहीं बल्कि फर्राटेदार अंग्रेजी बोलते मदरसों के तालिब ए इल्म की संख्या भी बढ़ेगी। तालिब ए इल्म हर किसी को हर क्षेत्र में अपनी काबिलियत से टक्कर देंगे। क्योंकि तालिब ए इल्म अब अंग्रेजी और हिन्दी माध्यम से भी शिक्षा हासिल कर सकेंगे। विकल्प मांगे जाने पर बड़ी संख्या में मदरसों ने अंग्रेजी भाषा को माध्यम चुना है। हालांकि अभी तक सबसे अधिक हिंदी माध्यम को चुना गया है। जबकि उर्दू और अंग्रेजी माध्यम चुनने वाले मदरसों की संख्या बराबर है।
केंद्र सरकार मदरसों को भी आधुनिक शिक्षा से जोड़ने के लिए प्रयासरत है। इसके लिए तमाम योजनाएं संचालित की जा रही हैं। मदरसों में दुनियावी तालीम को समय की आवश्यकता के अनुसार कंप्यूटर व अन्य संसाधनों से अपडेट किया जा रहा है। तो वहीं अब मदरसों में एनसीईआरटी की पुस्तकें भी लागू की गई हैं। मदरसे के तालिब ए इल्म विज्ञान-गणित की बारीकियां और ज्ञान भी हासिल करेंगे और आने वाले दिनों में इन मदरसों से ही गणितज्ञ, वैज्ञानिक निकलेंगे। मदरसों में एनसीईआरटी कोर्स लागू करने के लिए मदरसों से भाषा के माध्यम का विकल्प मांगा गया है। जिले में 347 मदरसों में 98 मदरसों ने अपने विकल्प अल्पसंख्यक कल्याण अधिकारी कार्यालय को उपलब्ध करा दिए हैं। इनमें उर्दू के बराबर ही अंग्रेजी भाषा को भी माध्यम के रूप में चुना गया है। जो अपने आप में एक नई शुरुआत है। यानि इन मदरसों में जो कोर्स उपलब्ध कराया जाएगा उसकी किताबें अंग्रेजी भाषा में होंगी।