नोटबंदी के बाद बाजार बुरी तरह लड़खड़ा कर रह गया है। बाजार में दुकानें तो खुल रही हैं, लेकिन ग्राहक गायब हंै। ग्राहक के गायब होने का असर सीधा व्यापार पर दिखने लगा है। यदि यही हालात आगे भी रहे तो जरूरी सामान के लिए भी लोगों को जूझना पड़ सकता है। साथ ही सामान के महंगा होने की भी उम्मीद जताई जा रही है। फिलहाल हर रोज बाजार को करीब 20 करोड़ की चोट लग रही है, जिससे व्यापारी वर्ग पूरी तरह तिलमिलाया हुआ है।
आठ नवंबर को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पांच सौ व एक हजार रुपये का नोट बंद करने का ऐलान कर दिया था। इस ऐलान के बाद से ही देश भर में कोहराम मचा हुआ है। लोग कतार में कैश केलिए खड़े हुए हैं,लेकिन कैश नहीं मिल पा रहा है। हर वर्ग का व्यक्ति सुबह से लेकर शाम तक कैश के लिए लंबी कतार लगा रहा है। नोटबंदी के पांच दिन हो गए। नोटबंदी से जहां एक ओर आम आदमी बुरी तरह परेशान दिख रहा है,वहीं व्यापार तबका भी कम परेशान नहीं है। सबसे बुरा असर व्यापार पर दिख रहा है।
बाजार सूने पड़े हैं। बात चाहें सर्राफा बाजार की जाए या फिर खाद्यान्न पदार्थ के बाजार के साथ ही कपड़ा, मैंथा, मंडी समेत अन्य कारोबार बुरी तरह लड़खड़ा गए हैं। सबसे बुरी हालत जरूरी सामान के बाजार की है। बाजार के हालात इस वक्त बेहद नाजुक है।
सहालग के समय पर गुलजार रहने वाला बाजार एक दम सूना पड़ा है,जिसकी वजह से दिक्कत महसूस हो रही है। रामपुर जिले में तकरीबन हर रोज 25 करोड़ का व्यापार होता है। मगर, नोटबंदी के बाद बाजार सूना है। दिन भर गुलजार रहने वाला मिस्टन गंज, बाजार नसरुल्ला खां, बर्तन बाजार, शाहबाद गेट, सिविल लाइंस गुरुद्वारा रोड, ज्वाला नगर का बाजार अब सूना होता जा रहा है। व्यापारी हाथ पर हाथ रखे बैठे हैं,जिससे लोगों की दिक्कत बढ़ी है। हर तबका बुरी तरह परेशान है।