रामपुर। लोकसभा चुनाव में भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा नाहटा को भाजपा जिलाध्यक्ष अपने गांव तक से नहीं जिता सके। उनके गांव में भी 379 वोटों से आजम खां विजयी रहे, जबकि जिला पंचायत अध्यक्ष के गांव से भी भाजपा प्रत्याशी जयाप्रदा को शिकस्त का सामना करना पड़ा। यहां तक कि जयाप्रदा अपने कई करीबियों के बूथ पर आजम खां के मुकाबले पिछड़ गईं। यही वजह रही कि जयाप्रदा को 1.10 लाख वोट से हार का सामना करना पड़ा।
यूं तो यह लोकसभा चुनाव भाजपा के लिए बेहद अहम था। एक-एक सीट के लिए भाजपा ने पूरी ताकत झोंक दी थी। यही वजह रही कि तमाम गठबंधनों के बावजूद भाजपा जीत गई। लेकिन, 2014 में जीती रामपुर संसदीय सीट पर भाजपा को हार का सामना करना पड़ा। इसके कई कारण रहे, किन्तु सबसे बड़ी वजह रही कि जयाप्रदा को उनके करीबियों और पार्टी नेताओं ने ही दिल से चुनाव नहीं लड़ाया। भाजपा जिलाध्यक्ष मोहन लाल सैनी की ही बात की जाए तो उनका गांव हरैटा है, जहां 263 और 264 नंबर बूथ हैं। दोनों ही बूथों पर 1008 लोगों ने अपने मताधिकार का प्रयोग किया, लेकिन जयाप्रदा को महज 282 वोट ही प्राप्त हो सके। जबकि, इसी गांव से गठबंधन प्रत्याशी आजम खां को 679 मत मिले। इस तरह आजम खां यहां से 397 वोट अधिक लेकर आए।
जिला पंचायत अध्यक्ष चन्द्रपाल सिंह के गांव में भाजपा का प्रदर्शन निराशाजनक रहा। गठबंधन प्रत्याशी आजम खां ने उनके गांव में भी जीत हासिल कर ली। शाहबाद के ग्राम टांडा वंशीधर के तीन बूथों से आजम खां को 746 वोट मिले हैं, जबकि भाजपा को 675 वोट हासिल हुए हैं। इस तरह यहां से भी आजम खां 71 वोटों से जीत गए। चुनाव में साए की तरह जयाप्रदा के साथ रहने वाले मुस्तफा हुसैन के गांव मीरापुर मीरगंज के तीन बूथों से भाजपा को महज 271 वोट मिले, जबकि इसी गांव से आजम खां को 1229 मत प्राप्त हुए और वह यहां से 958 वोटों से आगे रहे। सैफनी में भाजपा के कई नेता अपना गढ़ होने का दम भरते हैं, लेकिन यहां भी भाजपा नेताओं की पोल खुल गई है। सैफनी के 29 बूथों पर जयाप्रदा को 2470 वोट मिले हैं तो आजम खां को 5600 मत प्राप्त हुए हैं। सैफनी के दो बूथों 26 और 27 पर तो जयाप्रदा को दो-दो वोट मिले हैं।