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औलख के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराने को कोर्ट पहुंची पूर्व सभासद

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रामपुर। प्रदेश के अल्पसंख्यक कल्याण राज्यमंत्री बलदेव सिंह औलख के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग को लेकर पूर्व सभासद नेहा राज कोर्ट पहुंच गई हैं। उन्होंने अपर सत्र न्यायाधीश द्वितीय की अदालत में इसके लिए प्रार्थना पत्र दिया है। नेहा ने औलख पर वाल्मीकि समाज के लोगों के खिलाफ अभद्र टिप्पणी करने का आरोप लगाया है। कोर्ट ने इस मामले मेें सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस से रिपोर्ट तलब की है। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
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नेहा ने राज ने अदालत में दिए गए प्रार्थना पत्र में कहा है कि उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को अपने खून से खत लिखकर भेजा था। पत्र प्रधानमंत्री से अनुरोध किया गया था कि वह वाल्मीकि समाज के खिलाफ हो रहे उत्पीड़न की कार्रवाई को रोकें। क्योंकि वर्तमान सरकार में दलित, पिछड़ों और अनूसूचित जाति के लोगों के उत्थान के लिए कार्य करने वाले हमारे नेताओं के खिलाफ उत्पीड़ात्मक कार्रवाई की जा रही है। नेहा का आरोप है कि प्रदेश के राज्यमंत्री बलदेव औलख ने 25 सितंबर को गेस्ट हाउस में प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित किया था, जिसमें उन्होंने दलित समाज और उन्हें अपमानित करने के उद्देश्य से सार्वजनिक स्थल पर झूठे और गंदे खून का कहा था। उनका कहना है कि औलख ने पूरे दलित समाज को झूठा और गंदा खून कहकर उनके माता-पिता के चरित्र और उनकी जाति को नीचा दिखाया है। उन्होंने कहा है कि राज्यमंत्री से ऐसा जान बूझकर कहा है। नेहा ने कहा कि इस मामले में वह 30 सितंबर को राज्यमंत्री के खिलाफ रिपोर्ट लिखाने के लिए सिविल लाइंस कोतवाली गईं थीं। पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज करने के बजाए जांच करने की बात कही थी। एक माह से अधिक का वक्त बीत जाने के बाद भी रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई है। उन्होंने कहा कि इस मामले की जानकारी पुलिस अधीक्षक को रजिस्टर्ड डाक से पत्र भेजकर दी गई थी। इसके अलावा राष्ट्रीय अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के चेयरमैन को भी पत्र भेजा था, लेकिन इस मामले अभी तक कोई कार्रवाई नहीं हुई है। नेहा ने अपने वकील विक्की राज के माध्यम से प्रार्थना पत्र देकर राज्यमंत्री औलख के लिए रिपोर्ट दर्ज कराने की मांग की है। अदालत ने इस प्रार्थना पत्र पर संज्ञान लेते हुए सिविल लाइंस कोतवाली की पुलिस से रिपोर्ट दर्ज की है। मामले की अगली सुनवाई 14 नवंबर को होगी।
राज्यमंत्री बलदेव औलख ने नेहा राज के आरोप को सिरे खारिज किया है। उनका कहना है कि उन्होंने 25 सितंबर को प्रेस कांफ्रेंस को जरूर संबोधित किया था, लेकिन वाल्मीकि या दलित समाज के खिलाफ कोई टिप्पणी नहीं की है। प्रेस कांफ्रेंस की रिकॉर्डिंग भी देखी जा सकती है। उन्होंने कहा कि वह हर जाति और धर्म के लोगों का सम्मान करते हैं। औलख ने कहा कि आरोप राजनीति से प्रेरित हैं।
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