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40 साल पहले बुना गया महिला शिक्षा का ताना-बाना ध्वस्त

Sat, 16 Apr 2016 11:42 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो/ रायबरेली
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रायबरेली में सिविल लाइंस चौराहे के पास कमला नेहरू ट्रस्ट की वह जमीन, जिसका किया गया एग्रीमेंट। - फोटो : अमर उजाला
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40 साल पहले जिस जमीन पर महिला शिक्षा को बढ़ावा देने का ताना-बाना बुना गया था, वो ध्वस्त हो गया है। सरकारी अभिलेखों में करोड़ों की पांच बीघा जमीन कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी के नाम दर्ज हैं, जिसे अब सोसाइटी के कर्ता-धर्ता बेच रहे हैं।
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उपनिबंधन कार्यालय में एग्रीमेंट टू सेल भी करा दिया गया है। एग्रीमेंट कराने वाले दस्यु सरगना ददुआ के परिवारीजन हैं। मामले के खुलासे के बाद अब कांग्रेसी खेमा अपना दामन को बचाने में जुट गया है। क्योंकि सोसायटी के सचिव सुनील देव कांग्रेस के वरिष्ठ कार्यकर्ता भी बताए जाते हैं।

शहर के सिविल लाइंस चौराहे पर 12640 वर्ग मीटर (करीब पांच बीघा) जमीन कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी के नाम दर्ज है। सोसाइटी के सचिव सुनील देव ने इस जमीन का एग्रीमेंट चर्चित रहे दस्यु सरगना ददुआ के भाई व पूर्व सपा सांसद बालकुमार पटेल की पत्नी रामबाई पटेल, उनके पुत्र व वर्तमान सपा विधायक राम सिंह, सुधीर सिंह और राकेश सिंह के पक्ष में कर दिया है। यह जमीन 50 करोड़ से भी अधिक कीमत की बताई जाती है, लेकिन महज 9.30 करोड़ रुपये में इसका एग्रीमेंट कर गया है।
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इस जमीन को सोसाइटी ने जिले में महिला शिक्षा को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 1976 में 1135 रुपये सालाना किराए पर 30 वर्ष के लिए हासिल किया था। यहां महिला महाविद्यालय खोलने की योजना थी। निजी लाभ के चलते 10 मार्च 2016 को इसका रजिस्टर्ड सेल एग्रीमेंट करा दिया।

अभिलेखों के मुताबिक इस जमीन को वर्ष 2003 में कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी ने फ्री होल्ड कराया था। कब्जा न मिल पाने की वजह से 2011 में भूमि पर कब्जा दिलाने का प्रार्थनापत्र दिया गया। इस पर राजस्व निरीक्षक ने रिपोर्ट लगाते हुए फ्री होल्ड आदेश को ही वापस लेने (रिकॉल) की संस्तुति कर दी थी।

इसके बाद मामले ठंडे बस्ते में चल गया। मामला उजागर होने पर कांग्रेसी खेमे में अफरातफरी मची है। गौरतलब है कि रायबरेली से सांसद रही शीला कौल भी इस समिति की सदस्य थी। इस पूरे मामले में अभी तक सिर्फ एक कांग्रेसी नेता सुनील देव का ही नाम उजागर हुआ है।

लेकिन चर्चा है कि इसके पीछे कई ऐसे चेहरे भी हैं, जिन्होंने परदे के पीछे से इस पूरे मामले को अंजाम देने में सहयोग दिया है। भू-अभिलेखों के मुताबिक बाराबंकी के सिधौली निवासी कैलाश चंद्र से सोसाइटी ने भूमि को 30 वर्ष के लिए किराए पर लिया था।

कैलाश चंद्र ने इस भूमि पर विभिन्न लोगों को बसाया था और शेष बची भूमि को कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी को किराए पर दिया था। इस जमीन पर 150 गरीब दुकानदारों की आजीविका चल रही है। दुकानदारों की आजीविका चलने और शांतिभंग का हवाला देकर ही राजस्व निरीक्षक ने कब्जा कराने से मना करते हुए फ्री होल्ड आदेश को ही रिकॉल करने की संस्तुति की थी।

सांसद सोनिया गांधी का नाम कमला नेहरू एजूकेशन सोसाइटी से जोड़ने और सोसाइटी की संपत्ति के विक्रय मामले में नाम घसीटे जाने पर कांग्रेसियों में नाराजगी है। कांग्रेसियों ने शनिवार को डीएम को ज्ञापन देकर इस मामले की जांच कराए जाने की मांग की।

डीएम ने भरोसा दिया कि इस मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। जिला कांग्रेस कमेटी के जिलाध्यक्ष उमाशंकर मिश्रा ने इस प्रकरण में सोनिया गांधी का जिक्र करने वालों को राजनीतिक दुर्भावना से प्रेरित बताया।

कहा कि कुछ लोग इस मामले में दुष्प्रचार कर रहे हैं। ऐसे लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई के साथ-साथ सड़कों पर उतरकर विरोध किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि इस सोसाइटी से सोनिया गांधी या उनके परिवार से कोई लेना देना नहीं है। इस मौके पर रमेश कुमार शुक्ला, सईदुल हसन, निर्मल शुक्ला, हीरालाल यादव, जगदीश शुक्ल मौजूद रहे।

जमीन के किनारे दुकानें रखे दुकानदारों सुरेश कुमार मौर्य, किरन भागवत, राम सहाय यादव, रामकुमार यादव आदि ने सदर विधायक अखिलेश सिंह को ज्ञापन सौंपा। सभी ने विधायक से सोसाइटी के सदस्यों और जमीन का एग्रीमेंट कराने वाले ददुआ के परिवारीजनों पर कार्रवाई कराए जाने की मांग की। विधायक ने सभी को भरोसा दिया कि उनके साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा।
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