अप्रैल में गर्मी ने तीन साल का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। मौसम विभाग के अनुसार तीन वर्षों में गर्मी का पारा 43.0 डिग्री सेल्सियस नहीं पहुंचा। शुक्रवार व शनिवार को सबसे अधिक 43.0 सेल्सियस पारा नापा गया। इस साल अप्रैल शुरू से ही तप रहा है। दोपहर आते ही सड़कों पर सन्नाटा पसर रहा है।
दोपहर एक बजे स्कूल से छुट्टी होने के बाद तपते हुए बच्चे घरों को पहुंच रहे हैं। जिले में अब तक स्कूल का टाइम टेबल तक नहीं बदला गया है। इससे बच्चों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
वैसे तो देखा जाता है कि जेठ माह में ही गर्मी लोगों को रुलाती है लेकिन इस साल अप्रैल माह से ही गर्मी अपने शबाब पर है। सुबह दस बजे के बाद तेज धूप निकल आती है। इससे लोगों का घर से निकलना मुहाल हो जाता है। यही नहीं गर्म हवा चलती है।
ऐसे में घर से बाहर निकलने वाले लोगों को चेहरा ढकने पर मजबूर होना पड़ जाता है। लगातार तापमान बढ़ता जा रहा है। खास बात यह कि चार साल में इस बार अप्रैल सबसे अधिक गर्म है। वर्ष 2013 में 39.5 डिग्री सेल्सियस, वर्ष 2014 में 40.0 डिग्री सेल्सियस और वर्ष 2015 में 35.6 डिग्री सेल्सियस पारा ही अप्रैल के पहले पखवारे में पहुंचा है।
लेकिन अप्रैल वर्ष 2016 में यह पारा 43.0 डिग्री सेल्सियस के पार पहुंच गया है। स्थिति यह है कि दोपहर होते ही आम जनजीवन अस्त-व्यस्त हो रहा है। दोपहर में छुट्टी होेने के कारण बच्चों को गर्मी, धूप और लू का सामना करना पड़ रहा है।
गर्मी बढ़ने के बाद भी परिषदीय स्कूलों का टाइम टेबल नहीं बदला गया है। सुबह आठ बजे खुलने वाले परिषदीय स्कूल दोपहर एक बजे ही बंद हो रहे हैं। इससे बच्चों को धूप में परेशान होना पड़ रहा है।
तीन साल में अप्रैल में अधिकतम पारा
तारीख वर्ष 2013 वर्ष 2014 वर्ष 2015
16 अप्रैल 39.5 39.0 32.0
15 अप्रैल 39.0 40.0 31.0
14 अप्रैल 39.2 40.0 31.0
13 अप्रैल 38.8 39.0 29.0
12 अप्रैल 39.2 39.0 28.2
11 अप्रैल 39.0 38.0 35.0
10 अप्रैल 38.0 37.0 35.6
इंदिरा गांधी उड़ान अकादमी के मौसम विभाग के अधिकारियों का मानना है कि पिछले साल कम हुई बारिश के कारण ही अप्रैल में तापमान बढ़ गया है। इसके अलावा पिछले साल आया अलनीना तूफान भी इसका प्रमुख कारण है। अगले तीन चार दिन में तापमान के और भी बढ़ने के आसार हैं। शनिवार को तापमान 43.0 डिग्री सेल्सियस पहुंच गया है।
जिला अस्पताल के बाल रोग विशेषज्ञ डॉ. राजेंद्र शर्मा का कहना है कि बच्चों को धूप व लू से बचने की जरूरत है। स्कूल जाने वाले बच्चों के पीने का पानी जरूर है। यदि नमक मिला या फिर शिकंजी टाइप का पानी हो तो बेहतर है।
क्योंकि धूप और लू से यह पानी बच्चों के लिए बहुत जरूरी है। यदि लू की चपेट में बच्चा आ गया है तो उसे तत्काल चिकित्सक को दिखाएं। क्योंकि बच्चे के बढे़ तापमान को मैनेज करना बहुत जरूरी होता है। ऐसा न करने पर बच्चा गंभीर रूप से बीमार हो सकता है।
जिलाधिकारी सूर्यपाल गंगवार का कहना है कि परिषदीय स्कूलों के टाइम टेबल को बदलने के संबंध में शासन से कोई निर्देश नहीं मिले हैं। निर्देश मिलते ही समय बदला जाएगा। हालांकि गर्मी को देखते हुए इस संबंध में उच्चाधिकारियों से बात भी की जाएगी।