फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

प्रियंका के सामने महिलाओं और छात्राओं ने बयां की अपनी पीड़ा

विज्ञापन
विज्ञापन
रायबरेली। रिफार्म क्लब में आयोजित शक्ति संवाद कार्यक्रम में महिलाओं और छात्राओं ने प्रियंका गांधी के सामने अपनी पीड़ा रखी और बताया कि घरों में आज भी किस तरह उनके साथ भेदभाव किया जाता है। इस दौरान सभी ने महिलाओं और छात्राओं में जोश भरा और आह्वान किया कि अब हम किसी से कम नहीं। बस जरूरत है कि हिम्मत से अपनी लड़ाई लड़ें। कहा कि लड़की हूं लड़ सकती हूं अभियान से उत्साहित हूं। इससे निश्चित तौर पर बेटियां जागरूक होंगी।
विज्ञापन

पालीटेक्निक की छात्रा रुचि सिंह ने बताया कि घरों पर बच्चियों को आगे बढ़ने से रोका जाता है। उन्हें भी स्कूल नहीं भेजा जाता था। उनकी मां ने उन्हें आगे बढ़ाया और स्कूल भेजा। आज जिस भी मुकाम पर हूं, वह उनकी मां की देन है। मैं अपनी मां को तहे दिल से सलाम करती हूं।
खीरों ब्लॉक क्षेत्र के खंडेपुर गांव की रहने वाली अंजलि रावत ने बताया कि बेटियों को पढ़ने-लिखने से न रोका जाए। उन्हें भी कठिनाइयां झेलनी पड़ीं लेकिन उन्होंने हिम्मत नहीं हारी और आगे बढ़ती रहीं। बेटियां अब किसी से कम नहीं। बस उनकी हौसला आफजाई की जानी चाहिए।
विज्ञापन

नूर ने बताया कि वह मदर टेरेसा स्कूल में शिक्षिका के पद पर तैनात हैं। बेटियों को घरों में चूल्हा-चौका का काम सिखाने की बात कही जाती है। उनसे भी यही करने के लिए कहा गया था लेकिन उनकी मां ने उन्हें ऐसा नहीं करने दिया। उनकी मां ने उन्हें पढ़ाया और आज वह शिक्षिका के तौर पर बच्चों को पढ़ा रही हैं। बताया कि मेरी अभिभावकों से गुजारिश है कि बेटियों को घर तक सीमित न रखा जाए। उन्हें स्कूूल भेजा जाए। बेटों की तरह उन्हें सुविधाएं दी जाएं।
नेहा सिंह कहती हैं कि गांवों में बेटियों के साथ भेदभाव किया जाता है। बेटियां देर से घर जाती हैं तो लोग उनके माता-पिता से शिकायत करते हैं कि आपकी बेटी बिगड़ गई है। बेेटियों के बारे में इस तरह कहना गलत है। बेटियों को आगे बढ़ने दिया जाए। उन्हें खूब शिक्षित किया जाए। आशा बहू संगठन की जिलाध्यक्ष गीता मिश्रा ने कहा कि उन्हें भी शुरुआती दौर में कठिनाइयां झेलनी पड़ीं।
सरकार हमारी उपेक्षा कर रही है। अब हम हक के लिए एकजुट हुए हैं। बेटियों को अच्छी शिक्षा दी जाए। उनका अच्छे स्कूल में दाखिल कराया जाए। बेटियां अब किसी काम नहीं हैं। सावित्री पासी, उम्मे हबीबिया भी कहती हैं कि बेटियों के साथ भेदभाव न किया जाए।
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें