रायबरेली। रोगी कल्याण समिति का बजट किस-किस मद में खर्च हुआ, अब इसकी जांच होगी। शिकायत मिलने के बाद बजट में घालमेल की आशंका पर डीएम ने ये आदेश जारी किए हैं। जिलाधिकारी ने उक्त आदेश जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में दिया।
चालू वित्तीय वर्ष में शासन से बजट न मिलने के कारण अस्पतालों में रोगियों को सुविधाएं मुहैया कराने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। जिला अस्पतालों के सभी सीएचसी और पीएचसी को रोगियों को बेहतर सुविधाएं मुहैया कराने के लिए हर साल एक करोड़ से अधिक का बजट दिया जाता है। अस्पतालों के अधीक्षक अपने हिसाब से बजट को खर्च करके रोगियों को सुविधाएं मुहैया कराने का काम कराते हैं।
तमाम सीएचसी में कागजों पर ही काम कराकर भुगतान कर दिया जाता है। ऐसे में मरीजों को सुविधाएं मुहैया नहीं हो पाती है। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में डीएम ने कहा कि खंड विकास अधिकारी अस्पतालों में पहुंचकर कार्यों की जांच करके समय से रिपोर्ट उपलब्ध कराएंगे। सीएमओ डॉ. नवीन चंद्रा का कहना है कि रोगी कल्याण समिति से कराए गए कार्यों की गुणवत्ता को चेक किया जाएगा। सभी अधीक्षकों को इसके लिए निर्देशित कर दिया गया है।
खेल में दोषी बीसीपीएम पर कार्रवाई करने में नाकाम
स्वयं के नाम से फर्म बनाकर सरकारी अस्पतालों से लाखों रुपये का भुगतान लेने वाला डीह सीएचसी के बीसीपीएम (ब्लॉक कम्युनिटी प्रोसेस प्रबंधक) के कमेटी की जांच में दोषी पाए जाने के बाद भी विभाग कार्रवाई कर पाने में नाकाम है। रोगी कल्याण समिति में भुगतान में गड़बड़झाले की जांच अपर निदेशक डॉ. जीपी गुप्ता के आदेश पर हुई थी। बीसीपीएम ने एमएस लक्ष्य इंटरप्राइजेज के नाम से लाखों का भुगतान लिया था।
डीह के साथ ही नसीराबाद सीएचसी से भी स्वयं की फर्म के नाम भुगतान लिया था। दोष सिद्ध होने के बाद जिला स्वास्थ्य समिति की पिछली बैठक में डीएम ने बीसीपीएम को हटाने के आदेश दिए थे, लेकिन अब तक विभाग उसे हटाने का आदेश जारी नहीं कर सका है। जिला मिशन प्रबंधक राकेश सिंह का कहना है कि बीसीपीएम की पत्रावली डीएम को भेजी गई है। अब तक डीएम के यहां से वापस नहीं लौटी।