दो साल से कागजों पर उगल रहा पानी
खीरों। ब्लॉक के ठकुराइन खेड़ा मजरे सगुनी गांव के पास लगा राजकीय नलकूप संख्या 113 दो साल से खराब है, लेकिन यह कागजों पर पानी उगल रहा है। इसी तरह दहिरापुर, अखमऊपुर, पाहो, मदनापुर गांव में लगे राजकीय नलकूप खराब हैं। इस वजह से किसानों को पानी की समस्या से जूझना पड़ रहा है। कुछ किसान तो निजी नलकूपों के सहारे फसल तैयार कर लेते हैं, लेकिन फसल की लागत नहीं निकल पाती। जहां पर पानी की कोई सुविधा नहीं है, वहां खेत खाली पड़े हैं।
सीन दो
नलकूप खराब, कैसे होगी खरीफ की खेती
जगतपुर। ब्लॉक क्षेत्र के सिंघापुर भटौली गांव में राजकीय नलकूप काफी दिनों से खराब है। यह नलकूप कई बार खराब हुआ और ठीक कराया गया। रबी की फसल तैयार है। खरीफ की फसल की तैयारी चल रही है। यदि समय रहते नलकूप नहीं बनवाया गया तो किसानों को परेशानी का सामना करना पड़ेगा। किसानों ने बताया कि विभागीय अधिकारी और कर्मचारी यहां कभी नहीं आते हैं। किसान इसे खुद चलाते और बंद करते हैं। नलकूप खराब होने की शिकायत अधिकारियों से की गई, लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया।
सीन तीन
रीबोर कराने के बजाय उखाड़ ले गए ईंट
डीह। सलोन तहसील क्षेत्र के दरसवां गांव में लगा राजकीय नलकूप छह महीने पहले बरसात के दौरान धंस गया था। राजकीय नलकूप विभाग के कर्मचारी मौके पर आए। ठीक कराने के बजाय पंप हाउस की ईंट तक उखाड़ ले गए, लेकिन नलकूप को ठीक कराने की जहमत नहीं उठाई। इस वजह से किसानों को सिंचाई की समस्या से जूझना पड़ रहा है। तहसील से लेकर नलकूप विभाग के अधिकारियों से शिकायत की, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हुई। किराये के पानी से सिंचाई करनी पड़ रही है।
सीन चार
छह महीने से खराब सुलखियापुर का नलकूप
राही ब्लॉक क्षेत्र के सुलखियापुर ग्राम पंचायत में लगा राजकीय नलकूप आरजी 45 छह महीने से खराब है, लेकिन यह कागज पर अब भी चालू है। रबी सीजन में कई किसान पानी के अभाव में गेहूं की बोआई नहीं कर पाए। कुछ किसानों ने निजी नलकूपों के सहारे गेहूं की बोवाई की है। यदि खरीफ सीजन के लिए नलकूप ठीक नहीं हुआ तो किसान धान की फसल लगाने से वंचित रह जाएंगे।
रायबरेली। नलकूप विभाग के अफसरों की मनमानी से किसानों को फसलों की सिंचाई के लिए पानी नहीं मिल पा रहा है। हर साल रबी, खरीफ और जायद की बोआई के दौरान किसान आवाज उठाते हैं, लेकिन उनकी चीख अधिकारियों का कानों तक नहीं पहुंचती या फिर जानकर अनसुना कर देते हैं। यह चार केस तो बानगी भर हैं। ऐसे ही जिले में करीब 100 के आसपास राजकीय नलकूप कागजों पर तो चल रहे हैं, लेकिन धरातल पर वह पानी नहीं उगल रहे हैं। यह हालत तब है जब हर साल इनके रखरखाव पर 12 लाख रुपये उड़ा दिए जाते हैं। वैसे तो जिले में 373 राजकीय नलकूप लगे हैं, जिनमें कहीं मोटर खराब है तो कहीं पर तकनीकी खराबी के साथ कई जगह बोर तक भ्रष्ट हो गया है। इस वजह से नलकूप पानी नहीं दे रहे हैं। राजकीय नलकूप खराब होने से पांच हजार हेक्टेयर से ज्यादा जमीन परती पड़ी है।
मालामाल अफसर, बेबस किसान
राजकीय नलकूप विभाग में एक डिवीजन और चार उपखंड कार्यालय हैं। इन उपखंडों में सहायक अभियंता व अवर अभियंताओं की तैनाती है, जिनकी निगरानी में नलकूपों का संचालन होता है, लेकिन यह अधिकारी कभी कभार नलकूपों पर पहुंचते हैं। अन्यथा दफ्तर या फिर घर बैठे नौकरी होती है। विभाग में 373 नलकूपों के सापेक्ष 150 नलकूप चालकों की तैनाती है। इसमें हर किसी चालक के पास तीन से चार नलकूपों के संचालन की जिम्मेदारी है। ग्रामीणों का कहना है कि इनमें 50 फीसदी चालकों ने तो ग्रामीणों को नलकूप चलाने के लिए ठेके पर दे रखा है।
सरकारी में मुफ्त तो प्राइवेट में चुकाने पड़ते 120 रु. प्रति घंटे
राजकीय नलकूप खराब होने से किसानों के खेत परती पड़े हैं या फिर 120 रुपये प्रति घंटा निजी नलकूप चालकों को देकर सिंचाई करते हैं। इसके विपरीत सरकारी में मुफ्त सिंचाई है। अफसरों की लापरवाही से किसानों को जेब खाली हो रही है। खीरों ब्लॉक क्षेत्र के किसान विनोद कुमार वर्मा, वेद प्रकाश ने बताया कि ठकुराइनखेड़ा मजरे सगुनी गांव में लगा राजकीय दो साल से खराब है। ऐसे में किसानों को महंगे दामों पर सिंचाई करनी पड़ रही है। बीच में कई बार नलकूप को ठीक कराया गया, लेकिन दो घंटे से ज्यादा नहीं चल पाया। जगतपुर ब्लॉक क्षेत्र के किसान निर्भय सिंह, राजेंद्र ने बताया कि राजकीय नलकूप तो लगा है, लेकिन अक्सर खराब रहता है। रवी सीजन में कई बार ठीक कराया गया, लेकिन फिर खराब हो गया है। राही ब्लॉक क्षेत्र के सुलखियापुर ग्राम सभा में लगा राजकीय नलकूप आरजी 45 आठ महीने से खराब है। इस नलकूप से कलसहा और खनुवा गांव के किसान सिंचाई करते हैं। कलसहा के रहने वाले मनोज कुमार साहू, खनुवा निवासी दुजई ने बताया कि नलकूप खराब होने से ज्यादातर किसान इस बार गेहूं की बोवाई नहीं कर पाए। कई किसानों ने 120 रुपये प्रति घंटा निजी नलकूप चालकों को देकर सिंचाई की है। धान की फसल में तैयार होने में अधिक पानी की जरूरत होती है।
दावा, ज्यादातर नलकूप ठीक
जिले में 373 राजकीय नलकूप लगे हैं। इसमें से ज्यादातर ठीक हैं। कुछ नलकूपों में बीच-बीच खराबी आई थी, जिसे ठीक कराकर फिर से चालू कराया गया। इनके मेंटीनेंस पर हर साल 35 हजार प्रति नलकूप खर्च किया जाता है। इसमें नालियां की मरम्मत, मोटर जलने समेत अन्य काम कराए गए हैं। यदि कहीं गड़बड़ी या फिर किसानों को कोई दिक्कत है, तो उसे ठीक कराया जाएगा। -एके आजाद, एक्सईएन, राजकीय नलकूप विभाग