माध्यमिक शिक्षा परिषद की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट परीक्षा-2016 में वित्तविहीन स्कूलों में इस वर्ष पर्यवेक्षकों की तैनाती नहीं की जाएगी। बल्कि कॉलेज के प्रिंसिपलों को ही परीक्षा कराने का जिम्मा सौंपा गया है।
सिर्फ उन्हीं वित्तविहीन कॉलेजों में पर्यवेक्षकों की तैनाती की जाएगी। जहां के प्रिंसिपल परीक्षा कराने में सक्षम नहीं होंगे। परीक्षा के दौरान गड़बड़ी मिलने पर उन्हें हटाकर नया केंद्र व्यवस्थापक तैनात किया जाएगा।
साथ ही पर्यवेक्षक भी तैनात किया जाएगा। यही नहीं बहाना बताकर भागने वाले प्रिंसिपलों पर भी इस बार गाज गिर सकती है।
यूपी बोर्ड की हाईस्कूल और इंटरमीडिएट की परीक्षाएं 18 फरवरी से शुरू होंगी। नकलविहीन परीक्षा कराने के लिए प्रयास शुरू हो गया है।
अधिकाधिक संख्या में परीक्षा केंद्र बनने वाले वित्तविहीन कॉलेजों में इस वर्ष पर्यवेक्षकों की तैनाती नहीं की जाएगी। पूर्व के वर्षों में वित्तविहीन कॉलेजों में एडेड और राजकीय कॉलेजों के शिक्षकों को पर्यवेक्षक के तौर पर तैनात किया जाता था।
बोर्ड के इस फैसले से वित्तविहीन प्रिंसिपलों में अविश्वास की स्थिति उत्पन्न हो जाती थी। यूपी बोर्ड ने इस वर्ष कॉलेजों के प्रिंसिपलों की देखरेख में परीक्षा कराने को कहा है।
अगर परीक्षा के दौरान किसी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो तत्काल केंद्र व्यवस्थापक को बदल दिया जाएगा। गंभीर मामला मिलने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
यही नहीं परीक्षा नजदीक आते ही बीमारी का बहाना बताकर भागने वाले प्रिंसिपलों पर इस बार विभाग की गाज गिर सकती है।
यूपी बोर्ड ने कहा है कि बगैर पर्याप्त साक्ष्य के किसी भी प्रिंसिपल को नहीं छोड़ा जाएगा। कॉलेज के उन शिक्षकों पर भी कार्रवाई हो सकती है, जो कॉलेज से कार्यमुक्त होने के बाद परीक्षा ड्यूटी नहीं करते हैं।
डीआईओएस डॉ. विनय मोहन ने बताया कि शासन से जो निर्देश मिलेंगे, उसी के आधार पर काम किया जाएगा। शासन व बोर्ड से जो निर्देश आ रहे हैं, उनका अनुपालन कराया जा रहा है।