लालगंज कस्बे में ई-रिक्शा चलाती विद्यावती।
- फोटो : लालगंज कस्बे में ई-रिक्शा चलाती विद्यावती।
लालगंज (रायबरेली)। निहस्था गांव की विद्यावती के सिर पर जिम्मेदारियों का पहाड़ टूटा तो उन्होंने हिम्मत नहीं हारी। उनके सामने चार बच्चों का भविष्य संवारने की चुनौती खड़ी हो गई। विद्यावती ने हाथों में ई-रिक्शा की स्टीयरिंग थामने का फैसला कर बच्चों को बेहतर तालीम दिलाने का संकल्प लिया।
विद्यावती के पति का एक माह पहले निधन हुआ है। वह इस सदमे से उबर नहीं पाई हैं, लेकिन बच्चों के भविष्य के लिए आंसुुओं को अपनी ताकत बना ली है। वह रोज सुबह ई-रिक्शा लेकर निकलती हैं। इस काम से उन्हें रोजाना चार से पांच सौ रुपये की आमदनी हो रही है। इन्हीं पैसों से वह अपने छोटे-छोटे बच्चों की पढ़ाई लिखाई और कपड़े व रसोई का खर्च उठाती हैं। वह कहती है कि शुरुआत में ई रिक्शा चलाने में थोड़ी हिचक हुई, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी। उन्होंने बताया कि अब उनके बच्चे जब स्कूल जाते हैं तो गर्व से कहते हैं कि हमारी मां ई रिक्शा चलाती हैं। यही उनके लिए सबसे बड़ी ताकत है।