नोटबंदी की मार सब्जी की खेती करने वाले किसानों पर सबसे ज्यादा पड़ी है। नोटबंदी के चलते खरीद न होने से किसानों काो लागत निकालना भी मुश्किल हो रहा है। बड़ी मंडी से लेकर छोटी मंडी तक हर जगह मंदी की मार से किसान बेहाल हैं। सब्जी सस्ती होने के बावजूद भी ज्यादा बिक्री नहीं हो पा रही है।
जानकारी के मुताबिक दो माह पहले टमाटर 40 रुपये प्रति किलोग्राम, आलू 30 रुपये, शिमला 60 रुपये, प्याज 20 रुपये, गोभी प्रति पीस 30 रुपये, हरी धनिया 100 रुपये, और मिर्च 50 रुपये किलो मिल रही थी। नवंबर से स्थानीय किसानोें की सब्जियां भी बाजार में आ गई। बड़ी मंडी में माल ज्यादा आ गया।
लेकिन इसी बीच नोटबंदी ने उनकी मेहनत पर पानी फेर दिया। आढ़तियों के पास नकदी न होने से वे किसानों से उधारी पर जोर देने लगे। किसानों के नकदी पर जोर देने पर छोटे दुकानदारों ने उनकी मजबूरी का जमकर फायदा उठाना शुरू कर दिया। अब वे सीधे किसानों से सस्ते दामों पर सब्जी खरीद कर बेच रहे हैं।
किसान भी नकदी की लालच में सस्ते में ही सब्जी बेचने को मजबूर है। शिवगढ़ क्षेत्र के किसान शान मोहम्मद ने बताया कि इस बार तो गोभी की लागत निकालना मुश्किल हो रहा है। 56 रुपये लीटर का डीजल जलाकर और महंगी दवाएं खाद डालकर फूल गोभी तैयार की है।
अब गोभी के खरीदार 300 रुपये सैकड़ा गोभी के फूल खरीद रहे हैं। यही हाल बंद गोभी का भी है। 500 रुपये से कम बेचने पर नुकसान हो रहा है। किसी तरह खेत खाली कर भिंडी की बोआई करनी है। दो माह बाद फरवरी में भिंडी के दाम अच्छे मिलने की उम्मीद है।
किसान इश्तियाक का कहना है कि अगस्त में ही आलू की बोआई कर दी थी कि अच्छे दाम पर आलू बिक जाएगा। लेकिन आलू के दाम 600 से 700 रुपये प्रति क्विंटल मांगे जा रहे हैं। अब तो पूरी फसल निकाल कर पिछैती गेहूं की फसल बोना है। इससे नुकसान की भरपाई होने की कोशिश की जाएगी।
इसी तरह किसान रामू रावत का कहना है कि टमाटर इस सीजन में 20 रुपये किलो बिकता था लेकिन इस बार तो थोक में 800 रुपये क्विंटल व फुटकर में 10 रुपये प्रति किलोग्राम बेचना पड़ रहा है। किसान राकेश वर्मा ने बताया कि सीजन में सोया मेथी थोक में 600 रुपये प्रति क्विंटल बेचना पड़ रहा है। जबकि बाजार में फुटकर दुकानदार 10 रुपये किलो बेच रहे हैं।