रायबरेली। जगन्नाथपुर गांव निवासी अभिषेक यादव (27) की हत्या का रविवार को पुलिस ने पर्दाफाश कर दिया। चाचा ने दो साथियों के साथ मिलकर अभिषेक की हत्या की थी। पुलिस ने चाचा और उसके एक साथी को रविवार को गिरफ्तार किया। पूछताछ में चाचा ने बताया कि भतीजा अभिषेक आए दिन मारपीट करने के साथ घर की बहू-बेटियों को परेशान करता था। इससे तंग होकर हत्या कर दी।
पुलिस अधीक्षक डॉ. यशवीर सिंह ने बताया कि अभिषेक नशे का आदी था। नशा छुड़ाने के लिए परिजनों ने अभिषेक को नशा मुक्ति केंद्र गोमती नगर लखनऊ में भर्ती कराया था। बीते 30 नवंबर को अभिषेक को नशा मुक्ति केंद्र से छुट्टी मिल गई थी। एक दिसंबर को अभिषेक का शव बछरावां इलाके के छुटकवाखेड़ा गांव स्थित पुलिया के पास मिला था। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में अभिषेक की हत्या किए जाने की बात सामने आई थी।
एसपी ने बताया कि वारदात के पर्दाफाश के लिए बछरावां कोतवाली प्रभारी राजीव कुमार सिंह की अगुवाई में पुलिस टीम गठित की गई थी। अभिषेक की हत्या के मामले में जगन्नाथपुरु गांव निवासी रामचंद्र यादव और बछरावां कोतवाली क्षेत्र के गोझवा मनाखेड़ा मजरे शेषपुर समोधा गांव निवासी रमेश यादव को पकड़ा गया है।
बछरावां इलाके के रामपालखेड़ा गांव निवासी विजय यादव फरार है। एसपी ने बताया कि पूछताछ में आरोपी रामचंद्र यादव ने अपने भतीजे अभिषेक की हत्या साथियों के साथ करने की बात स्वीकार की है। जांच में पता चला है कि जिस दिन अभिषेक को नशा मुक्ति केंद्र से छुट्टी मिली थी, उसी दिन चाचा ने साथियों के साथ वैन पर अभिषेक को गांव ले चलने की बात कहकर बैठा लिया था। देर रात सभी बछरावां इलाके में पहुंचे।
अभिषेक को शराब पिलाई और फिर उसे सड़क पर फेंक दिया। इसके बाद वैन उसके शरीर पर चढ़ा दी। अभिषेक की मौत होने पर शव को पुलिया के पास फेंक दिया और फरार हो गए। एसपी ने बताया कि दो से तीन बार अभिषेक के शरीर पर वैन चढ़ाई थी। इससे शरीर क्षत विक्षत हो गया था।
जांच में पता चला कि मृतक अभिषेक पहले दवा की बिक्री कारोबार से जुड़ा था। बाद में नशा करने लगा। घटना में प्रयुक्त वैन को कब्जे में लिया गया है।
सीसीटीवी फुटेज से खुला चाचा का जुर्म
बछरावां कोतवाली प्रभारी राजीव सिंह बताते हैं कि पुलिस के पास घटना का कोई सुराग नहीं था। परिजन भी घटना के बारे में कुछ नहीं बता पा रहे थे। लखनऊ से लेकर घटनास्थल तक लगे सीसीटीवी कैमरे की फुटेज खंगाली गई। कई फुटेज में अभिषेक वैन में बैठा दिखा था।
वैन के बारे में सारी जानकारी जुटाई गई। जांच में पता चला कि चाचा ने वैन एक स्कूल संचालक से ली थी। चाचा को हिरासत में लेकर पूछताछ की गई तो उसने घटना को अंजाम देने की बात स्वीकार कर ली। फरार आरोपी विजय और रामचंद्र आपस में दूर के रिश्तेदार भी हैं।