रायबरेली। जिला महिला अस्पताल व सभी 16 सीएचसी में प्रसूताओं को अल्ट्रासाउंड जांच ठप है। जांच की सुविधा न मिलने से महिलाओं को भटकना पड़ रहा है। महिला अस्पताल में रोजाना ओपीडी में 300 से अधिक प्रसूताएं पहुंचती हैं, लेकिन उन्हें अल्ट्रासाउंड जांच बाजार से करानी पड़ती है।
स्वास्थ्य सेवाएं पूरी तरह से प्रभावित होने से महिलाओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इससे स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही से जिले में जच्चा-बच्चा को स्वस्थ रखने की मंशा तार-तार हो गई है। जिला महिला अस्पताल के सोनोलॉजिस्ट डॉ. राजीव दीक्षित का जुलाई महीने में तबादला हो गया था। इसके बाद महिला अस्पताल में प्रसूताओं की अल्ट्रासाउंड जांच ठप हो गई।
इसके अलावा जिले की सीएचसी में आने वाले गर्भवती महिलाओं को भी अल्ट्रासाउंड जांच की सुविधा नहीं मिल पा रही है। हालांकि सीएचसी में मशीनें उपलब्ध हैं, लेकिन सोनोलॉजिस्ट के न होने के कारण जांच नहीं हो पा रही है। गर्भावस्था में प्रसूताओं के गर्भ की जांच अल्ट्रासाउंड से ही हो सकती है।
इस जांच के बाद अच्छे तरीके से गर्भ की देखरेख की जा सकती है, लेकिन जांच की सुविधा बंद होने के कारण प्रसूताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जिला स्वास्थ्य समिति के माध्यम से वॉकिंग इंटरव्यू कराकर सात डॉक्टरों की तैनाती कराने का प्रयास जुलाई महीने में शुरू किया गया, लेकिन स्वास्थ्य विभाग की लापरवाही के कारण अब तक सोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था न होने से अल्ट्रासाउंड जांच शुरू नहीं हो सकी है।
जिला महिला अस्पताल के साथ ही सीएचसी बछरावां, ऊंचाहार, डलमऊ, सलोन, महराजगंज में अल्ट्रासाउंड की जांच शुरू कराने की मंशा थी। अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए नई महिला डॉक्टरों को एक-एक सप्ताह का अल्ट्रासाउंड जांच का प्रशिक्षण दिलाकर तैनात करना था, लेकिन अब तक यह काम पूरा नहीं कराया गया है।
नयापुरवा निवासी सीमा, बिनोहरा निवासी प्रियंका, प्रगतिपुरम निवासी सुधा तिवारी व गढ़ी खास निवासी शांती का कहना है कि महिला अस्पताल की ओपीडी में डॉक्टर ने अल्ट्रासाउंड जांच लिखा था, लेकिन अस्पताल में सुविधा न होने के कारण रुपये खर्च करके बाजार में यह जांच करानी पड़ी है। महिलाओं को जांच के लिए भटकना पड़ता है, क्योंकि बिना अल्ट्रासाउंड जांच के इलाज भी ठीक तरीके से नहीं हो सकता है। महिलाओं का कहना है कि क्या करें। बाजार से मजबूरन जांच करानी पड़ रही है।
सीएमओ डॉ. शरद कुमार वर्मा का कहना हे कि जिला महिला अस्पताल में अल्ट्रासाउंड की जांच के लिए सोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था के लिए शासन को पत्र भेजा गया है। जल्द ही चिकित्सक की व्यवस्था होते ही जांच शुरू करा दी जाएगी। इसके अलावा कुछ सीएचसी के लिए भी सोनोलॉजिस्ट की व्यवस्था कराने का प्रयास किया जा रहा है।