रायबरेली। कूड़ों के ऊंचे-ऊंचे ढेर व इनसे उठने वाली दुर्गंध से लोगों को जल्द राहत मिलने वाली है। कारण, जिले में जल्द ही अब हाईटेक ट्रोमल मशीन के जरिये 80 हजार मीट्रिक टन कूड़े का निस्तारण कराए जाने की कवायद शुरू हो गई है।
इससे बढ़ता वायु व जल प्रदूूषण दूर होगा। कूूड़ा निस्तारण कराने का काम शासन की ओर से कार्यदायी संस्था को सौंपा गया है। ट्रोमल मशीनें यहां पर आ गईं हैं। बस प्लांट को बिजली कनेक्शन का इंतजार है।
शहर में दो डंपिंग ग्राउंड हैं, जिसमें एक पटेल नगर और दूसरा जैतूपुर है। दोनों ही स्थानों पर कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेर लगे हैं, जिनमें आए दिन आग लगने की घटनाएं होती रहती हैं।
इससे वायु प्रदूषण होता है। साथ ही कूड़े का निस्तारण न होने की वजह से बारिश का पानी भी प्रदूषित हो जाता है, जो वायुमंडल को प्रभावित करता है।
शहर में दोनों ही स्थानों पर करीब 80 हजार मीट्रिक टन कूूड़ा डंप है। शासन ने कूड़ा निस्तारण कराने की जिम्मेदारी जल निगम की निर्माण इकाई सीएनडीएस को दी है।
सीएनडीएस ने इस काम को कार्यदायी संस्था रिकार्ट इन्वोवेशन प्राइवेट लिमिटेड को सौंपा है। कूड़ा निस्तारण का काम ट्रोमल मशीन के जरिये कराया जाएगा।
बताते हैं कि कानपुर, लखनऊ समेत अन्य बड़ों शहरों में कूड़ा निस्तारण का काम ट्रोमल मशीनों के जरिये ही कराया जाता है। पहली बार रायबरेली शहर में कूड़ा निस्तारण के लिए ट्रोमल मशीनों का प्रयोग किया जाएगा।
क्या होता है ट्रोमल
ट्रोमल एक ऑटोमैटिक मशीन है, जिसके माध्यम से कूूड़े को छांटा जाता है। इसमें शीशा, प्लास्टिक, गलनशील कूूड़ा आदि अलग-अलग हो जाएगा, जिसके बाद इससे जैविक खाद तैयार होगी, जो कंपनियों को बेच दी जाएगी, जबकि बचा कूड़ा जमीन में दबाकर निस्तारित कर दिया जाएगा।
ये होंगे फायदे
कूड़े के ऊंचे-ऊंचे ढेरों से राहत मिल जाएगी, जिससे शहर साफ सुथरा नजर आएगा। आए दिन कूड़े के ढेरों में आग लगने से लोगों के लिए मुश्किलें पैदा हो जाती हैं। इस समस्या का समाधान भी हो जाएगा। कूड़े के निस्तारण होने से वायु और जल प्रदूषण भी बंद होगा। ठप पड़ा कूड़ा निस्तारण प्लांट शुरू हो सकेगा। आसपास के क्षेत्रों के लोगों को दुर्गंध से राहत मिलेगी।
बिजली कनेक्शन मिलने में देरी
ट्रोमल मशीनों के जरिये कूड़े का निस्तारण कराने के लिए बिजली कनेक्शन की जरूरत है। बिजली कनेक्शन दिलाने का काम नगर पालिका को दिया गया है।
एक पखवाड़े पहले कनेक्शन के लिए नगर पालिका की ओर से आवेदन कर दिया गया है, लेकिन अब तक कनेक्शन नहीं मिल पाया है। कहा जा रहा है कि कनेक्शन न मिलने की वजह से ही कूड़े का निस्तारण का कार्य शुरू नहीं हो पाया है, जबकि ट्रोमल मशीनें यहां पर आ गईं हैं।
महज शोपीस बना कूूड़ा निस्तारण प्लांट
शहर के जैतूपुर में स्थापित कूड़ा निस्तारण प्लांट महज शोपीस बनकर रह गया है। काफी समय से यह प्लांट बंद चल रहा है, जिससे कूूड़े का निस्तारण नहीं हो पा रहा है। इस वजह से जैतूपुर के अलावा आसपास रहने वाले लोगों को कूड़े के ढेर लगने की वजह से परेशानी झेलनी पड़ रही है। आए दिन कूड़े में आग भी लग जाती है। माना जा रहा है कि कूड़े का निस्तारण होने के बाद इस प्लांट को चालू करने में मदद मिलेगी।
शहर में डंप 80 हजार मीट्रिक टन कूड़े के निस्तारण के लिए शासन की ओर से कार्यदायी संस्था सीएनडीएस को काम दिया गया है। पहली बार ट्रोमल मशीनों के जरिए कूूड़े का निस्तारण कराया जाएगा। ऐसा होने से शहर साफ सुथरा होने के साथ वायु प्रदूूषण भी दूर होगा। बिजली कनेक्शन कराने की प्रक्रिया चल रही है।
डॉ.आशीष कुमार सिंह, ईओ, नगर पालिका परिषद, रायबरेली