रायबरेली। शिवगढ़ क्षेत्र के राघवनाथ मंदिर से अष्टधातु की मूर्तियां चुराने वाले तीन आरोपियों को बृहस्पतिवार की रात गिरफ्तार कर लिया गया। इनके पास से पुलिस ने चोरी की मूर्तियां बरामद कर ली हैं। इन मूर्तियों की कीमत करीब एक करोड़ रुपये बताई जा रही है। पकड़े गए तीनों आरोपी बाराबंकी जिले के रहने वाले हैं। घटना में शामिल एक अन्य आरोपी पकड़ से दूर है। पुलिस के मुताबिक महिला पुजारी के गांव के युवक ने ही साथियों के साथ मंदिर से मूर्तियां चुराने की साजिश रची थी।
पुलिस कार्यालय में शुक्रवार को आयोजित प्रेसवार्ता में अपर पुलिस अधीक्षक संजीव कुमार सिन्हा ने बताया कि शिवगढ़ क्षेत्र के जसवंतखेड़ा मजरे सूरजपुर गांव स्थित राघवनाथ मंदिर से 25 मार्च की रात चोरों ने अष्टधातु की राम, लक्ष्मण व जानकी की मूर्तियां चोरी कर ली थीं। गांव की रहने वाली पुजारी 62 वर्षीय कृष्णा देवी की तहरीर पर केस दर्ज किया गया था। घटना के खुलासे के लिए थाना प्रभारी विंध्य विनय और एसओजी प्रभारी विजेंद्र शर्मा की अगुवाई में पुलिस टीमें लगाई गई थीं।
मामले में देर रात पुलिस की टीमों ने बाराबंकी जिले के सतरिख क्षेत्र के खानपुर धौरहरा गांव निवासी जगेसर उर्फ धुन्ने उर्फ बाबूलाल, कोठी क्षेत्र के बुधनई निवासी चंद्रशेखर उर्फ राहुल और लोनी कटरा क्षेत्र के अमित कुमार को दबोच लिया। वहीं, लोनी कटरा के बेडौरा निवासी रिंकू अभी पकड़ से दूर है।
एएसपी के मुताबिक महिला पुजारी कृष्णा देवी का मायका बाराबंकी जिले के लोनी कटरा क्षेत्र के बेडौरा गांव में है। भतीजे सतीश का दादी कृष्णा के घर आना जाना था। कृष्णा हर साल मंदिर में भंडारे का आयोजन करती थीं। सतीश का दोस्त आरोपी अमित अपने साथी रिंकू के साथ भंडारे में शामिल होने के लिए कई बार आया था। इस दौरान अमित ने मंदिर में मूर्तियां को देखा था और उनकी चोरी करने का प्लान रिंकू, जगेसर, राहुल के साथ बनाया था।
अमित के घर से बरामद हुईं मूर्तियां
मूर्तियां चोरी करने के बाद आरोपी अपने-अपने घर चले गए थे। अमित ने अपने ही घर में तीनों मूर्तियां को छिपाकर रखा था। सर्विलांस के जरिए पुलिस आरोपियों तक पहुंची। एएसपी के मुताबिक सभी आरोपी मूर्तियों को बेचने के लिए खरीदार को खोज रहे थे। इधर, पुलिस टीमें उनकी गिरफ्तारी के लिए प्रयास कर रही थीं।
बरीक्षा कार्यक्रम का उठाया था फायदा
दरअसल, सतीश का 25 मार्च को बरीक्षा कार्यक्रम था। इसलिए महिला पुजारी अपने गांव चली गई थीं। इसकी जानकारी अमित हो थी। इसी का फायदा उठाते हुए अमित ने साथियों के साथ मंदिर का ताला तोड़कर तीनों मूर्तियां चुरा लीं थी।