रायबरेली। सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेशंद और जस्टिस नानग्मैकापम कोटीश्वर सिंह की बेंच ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के रायबरेली विकास प्राधिकरण (आरडीए) के खिलाफ आए फैसले में यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। आरडीए की ओर से भूमि के अधिग्रहण, आवंटन, बैनामा और दो मंजिला भवन बनने के बाद हाईकोर्ट के न्यायाधीश ब्रजराज सिंह और संगीता चंद्रा की पीठ ने बीती 24 फरवरी 2026 फैसला सुनाया था।
लखनऊ-प्रयागराज हाईवे पर शहर के अख्तियारपुर में माता बख्श की भूमि को आरडीए ने 30 मई 2009 को अधिग्रहीत किया था। भूमि अधिग्रहण के बाद माता बख्श ने वर्ष 2010 में और मुआवजा दिलाने के लिए डीएम से अनुरोध किया था। वर्ष 2015 में उन्होंने आरडीए से जमीन वापसी के लिए दीवानी कोर्ट में केस किया था। उन्होंने हाईकोर्ट में भी भूमि अधिग्रहण को चुनौती देते हुए केस किया था।
वर्ष 2022 में माता बख्श ने हाईकोर्ट से अधिग्रहीत भूमि को वापस दिलाने की याचना की थी। आरडीए ने सात जुलाई 2023 को संबंधित भूमि के साथ अन्य प्लॉटों की नीलामी प्रक्रिया शुरू की थी। दो नवंबर 2023 को हाईकोर्ट ने माता बख्श को जमीन के लिए सरकार के पास जाने का आदेश दिया। हालांकि 20 फरवरी 2024 को सरकार ने जमीन वापस करने से इन्कार कर दिया।
आरडीए ने आवंटन प्रक्रिया पूरी करते हुए आवंटी आदिल खान के पक्ष में दो मार्च 2024 को बैनामा कर 22 मार्च 2024 को आवंटी को कब्जा भी दे दिया था। आवंटी आदिल खान ने 28 मार्च 2024 को आरडीए से मैप पास कराकर भूमि पर दो मंजिला भवन का निर्माण भी करा लिया। निर्माण कार्य पूरा होने के बाद 10 जुलाई 2024 को हाईकोर्ट ने भूमि पर स्थगन आदेश पारित किया।
इसके बाद हाईकोर्ट ने 24 फरवरी 2026 को भूमि के मालिक के पक्ष में फैसला सुनाया था। आदेश के खिलाफ आरडीए व आवंटी ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया, जिसमें सुप्रीम कोर्ट के जस्टिस एमएम सुंदरेशंद और जस्टिस नानग्मैकापम कोटीश्वर सिंह की बेंच ने दोनों पक्षों को यथास्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है। आरडीए के सचिव विशाल यादव का कहना कि सुप्रीम कोर्ट ने यथा स्थिति बनाए रखने का आदेश दिया है।