अपने परिवार के लोगों के साथ मतदान केंद्र पर पहुंचकर मताधिकार का प्रयोग किया। पूछने पर उनका जवाब था कि चल न पाने से कष्ट तो होआत है पर वोटौ तो डालब अब जरूरी होइगवा।
यही नहीं कई ऐसे और बुजुर्ग लोग थे, जिनके लिए लाठी और कोई दूसरा चलने के लिए सहारा बनता है, लेकिन वोट डालने में पीछे नहीं रहे। हर बूथ पर उनकी भागीदारी इस का गवाह बनी।
स्थान महराजगंज ब्लॉक क्षेत्र के मतदान केंद्र प्राथमिक स्कूल जिहवा। गांव की रहने वाली मायावती जमीन पर दोनों पैर से घिसटते हुए बूथ से बाहर निकल रही थी।
उसके दोनों पर चलने लायक नहीं हैं, पर उसके चेहरे पर गजब का उत्साह था। बूथ से बाहर निकली तो उनके परिवार का एक युवक ने उसे गोदी में लेकर सड़क तक पहुंचाया और फिर वहां उसे बाइक से घर ले जाया गया।
यहीं की रहने वाली शकीनाबानो भी दोनों पैर से निशक्त थी, लेकिन उसमें भी वोट डालने का उत्साह था। उसे भी एक युवक ने बूथ तक पहुंचाया।
हरचंदपुर ब्लॉक क्षेत्र के मतदान केंद्र प्राथमिक स्कूल शोरा गंगागंज में शिमला देवी अपे नाती रजनीश के साथ वोट डालने आई थी। 90 वर्षीय शिमला देवी का कहना था कि बुढ़ापे में केंद्र तक आने जाने में दिक्कत तो होती है, लेकिन वोट डालना भी जरूरी है।
प्राथमिक विद्यालय मतदान केंद्र मोन में भी 90 वर्षीय बाबादेई अपने नाती के साथ वोट डालने केंद्र पर पहुंची। आंगनबाड़ी केंद्र के मतदान केंद्र शोरा में भी 91 वर्षीय बिटाना वोट देने पहुंची।
पंचायत चुनाव के दूसरे चरण में अधिकतर बूथों पर निशक्त पुरुष, महिलाएं भी वोट डालने में पीछे नहीं रहे।