रायबरेली। शहर के रेलवे स्टेशन पर नई वाशिंग लाइन बनाने का काम 12 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। नई वाशिंग लाइन बनने से क्षमता बढ़ती और ज्यादा से ज्यादा कोचों की मेंटेनेंस का काम हो सकता था, जिससे रायबरेली से कई ट्रेनों का संचालन शुरू करने में सुविधा मिलती।
कोरोना काल में रायबरेली से चलने वाली दो महत्वपूर्ण ट्रेनें भी बंद हुई थीं, जिनका संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है। नई वाशिंग लाइन शुरू होगी तो बंद ट्रेनों के पटरी पर लौटने की उम्मीद जगेगी। नई ट्रेनों के संचालन की उम्मीद भी बढ़ जाएगी। रायबरेली स्टेशन पर पुरानी वाशिंग लाइन है, जिसकी क्षमता कम है। इस पर सिर्फ 10 बोगियों तक वाली ट्रेनों की मेंटेनेंस हो पाती है।
भविष्य में ट्रेनों की संख्या बढ़ाने की योजना के तहत नई वाशिंग लाइन बनाने का काम 12 साल पहले शुरू हुआ था, लेकिन अब तक वाशिंग लाइन पूरी नहीं हुई। इस वजह से नई ट्रेनों के संचालन की उम्मीद भी टूट रही है। पहले से चल रही दो महत्वपूर्ण ट्रेनें भी वापस पटरी पर नहीं लौट सकती है। इन ट्रेनों को कोरोना काल में बंद किया गया था। इनमें मुंबई जाने वाली साकेत लिंक एक्सप्रेस और कानपुर जाने वाली पैसेंजर ट्रेन शामिल हैं। दोनों ही ट्रेनें रायबरेली से चलती थीं।
कुछ सुविधाएं बाकीं, पूरा होते ही शुरू होगी वाशिंग लाइन
रायबरेली। उत्तर रेलवे के मुख्य अभियंता (सामान्य) आलोक कुमार ने कहा है कि रायबरेली स्टेशन की वाशिंग लाइन नंबर एक और दो कंस्ट्रक्शन विभाग बना रहा है। इसमें कुछ मुख्य सुविधाओं का समायोजन किया जाना बाकी है। कंस्ट्रक्शन विभाग इन सुविधाओं को जैसे ही उपलब्ध करा देगा, वैसे ही वाशिंग लाइनों को प्रयोग करने के लिए खोल दिया जाएगा। मुख्य अभियंता ने यह बात एक पत्र के माध्यम से कही है।
क्षेत्रीय रेलवे उपयोगकर्ता परामर्शदात्री समिति के सदस्य गया प्रसाद शुक्ल ने वाशिंग लाइन के मुद्दे पर सुझाव दिया था, जिसके जवाब में यह पत्र भेजा गया है। समिति सदस्य ने कहा था कि रायबरेली स्टेशन में वाशिंग लाइन का कार्य लगभग 12 साल से चल रहा है, लेकिन अब तक पूरा नहीं हो सका है। इस कारण रायबरेली से नई गाड़ियों का संचालन नहीं हो पा रहा है। (संवाद)