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कड़ाके की ठंड में टूट रही धान तौलाने की उम्मीद

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रायबरेली। कड़ाके की ठंड में दिन रात एक करके केंद्रों पर पहुंचने वाले किसानों की धान तौलाने की उम्मीद टूट रही है। हालात ये हैं कि केेंद्रों पर बिचौलिये हावी हैं।
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किसान बेबस और लाचार हैं। दिक्कत आ रही है कि धान तौलाने के लिए किसानों को लंबी तारीख दी जा रही है, जबकि सेटिंग-गेटिंग होने से केंद्र प्रभारी पहले बिचौलियों का धान की तौल कर लेते हैं। यह हाल तब है, जब अगले माह तक ही खरीद होनी है। लक्ष्य पूरा करना बाकी है और केंद्रों पर धान लेकर पहुंचने वाले लोग कम नहीं हो रहे हैं। सवाल उठ रहा है कि आखिर धान केंद्रों पर पहुंच कहां से रहा है।
जिले के किसानों का धान खरीदने के लिए इस बार 71 क्रय केंद्र खोले गए हैं। इन केंद्रों पर एक लाख 76 हजार 700 मीट्रिक टन धान खरीदने का लक्ष्य रखा गया है। अब तक एक लाख 43 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है।
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हाल ये है कि इतनी खरीद होने के बाद भी केंद्रों पर बड़ी संख्या में किसान धान लेकर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं। शुरुआती दौर से खराब खरीद व्यवस्था अब तक पटरी पर नहीं लौटी है।
कड़ाके की ठंड में किसान धान लेकर केंद्रों पर पहुंच रहे हैं, लेकिन उनका धान नहीं तौला जा रहा है। किसी किसान को 10 दिन तो किसी किसान को 15 दिन बाद आने के लिए कहा जाता है।
बकायदा किसानों को तारीख दे दी जाती है। वहीं बिचौलियों का धान आसानी से केंद्रों पर तौला जा रहा है। यह देखने वाला कोई नहीं है। इससे किसान हताश और निराश हैं। जिले में 28 फरवरी तक धान खरीद होनी है।
केंद्रों पर 39 हजार मीट्रिक टन धान डंप
जिले के क्रय केंद्रों से धान उठान का काम भी बेहद धीमा चल रहा है। इसका अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि केंद्रों पर 39 हजार मीट्रिक टन धान डंप है।
धान उठान न होने के कारण भी खरीद प्रभावित है। कई स्थानों पर धान खुले आसमान के नीचे लगा है। अधिकारियों के चुनाव में व्यस्त होने के कारण यह सब कोई देखने वाला नहीं है।
बोले किसान, बिचौलियों का खरीदा जा रहा धान
बछरावां। क्षेत्र के इसिया गांव निवासी पवन शुक्ला ने बताया कि वह अपना धान कसरावां स्थित साधन सहकारी समिति में बेचने गए थे, लेकिन वहां कभी बोरा न होने का बहाना तो कभी पल्लेदार नहीं है का बहाना बनाकर वापस कर दिया गया। मजबूरी में अपना धान बाजार में 1300 रुपये प्रति क्विंटल की दर से बेचना पड़ा।
देवपुरी गांव निवासी अयोध्या प्रसाद ने बताया कि वह अपना धान तिलेंडा स्थित नेफेड धान क्रय केंद्र पर लेकर गए थे और वहां उनका धाम पंद्रह दिनों तक बोरियों में भरा रखा रहा, लेकिन तौल नहीं कराई गई। मजबूरी में अपना धन वापस लाकर खुले बाजार में सस्ते दाम पर बेंच दिया। बछरावां कस्बे के दक्षिण टोला निवासी रामकिशोर का धान नेफेड धान क्रय केंद्र तिलेंडा में एक हफ्ते से ट्रैक्टर ट्राली में लदा खड़ा था।
तौल न होने पर धान वापस लाकर खुले बाजार में सस्ते दर पर बेच दिया। किसान रामकिशोर ने बताया कि नेफेड धान क्रय केंद्र तिलेंडा में किसानों के कागजात लगाकर सीधे बिचौलियों से धान खरीदकर शासन प्रशासन की आंखों में धूल झोंकी जा रही है। असली किसानों को वापस कर दिया जाता है। बछरावां कस्बे के महराजगंज रोड निवासी श्रीश कुमार ने बताया कि तिलेंडा स्थित नेफेड धान क्रय केंद्र पर किसानों के फर्जी कागजात लगाकर खानापूर्ति की जाती है और बिचौलियों का नाम सीधे मिल पहुंचा दिया जाता है।
जिले में लक्ष्य के सापेक्ष एक लाख 43 हजार मीट्रिक टन धान खरीदा जा चुका है। केंद्रों पर किसानों का धान तौला जा रहा है। कहीं पर बिचौलियों का धान नहीं तौला जा रहा है। इस तरह की शिकायत भी नहीं आई है। यदि किसी किसान को धान बिक्री करने में कोई दिक्कत आ रही है तो वह अपनी शिकायत दर्ज करा सकते हैं।
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रामानंद जायसवाल, डिप्टी आरएमओ
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